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कोई हो अगर तो बताना ©तुषार पाठक

कोई तुझे मुझसे ज्यादा चाहे तो बताना,  कोई तेरी एक अभिलाषा को पूरा करे तो बताना,  कोई तेरे हर दुःख में खड़ा हो तो बताना,  कोई तेरे लिए अपने परिवार से लड़ जाए तो बताना,  कोई तेरे एक बार पुकारने पर आ जाए तो बताना, कोई तेरे लिए बचपन के दोस्त छोड़ दे तो बताना, कोई तुझपर कविता लिखे तो बताना,  कोई तेरे हर एक नख़रे उठाए तो बताना,  कोई तेरी हर मुस्कुराहट का कारण बन जाए तो बताना,  कोई तेरे लिए खुद को भी मार दे तो बताना।  कोई तेरी ज़िंदगी में हर पल पर साथ खड़ा हो तो बताना! कोई तेरे हर सवालों का जवाब बन जाए तो बताना, कोई तेरा होकर तुझे बताय तो बताना!! @तुषार पाठक

हनुमान ©तुषार पाठक

  राम के भक्त हो तुम, तुम्हारे भक्त हैं हम। तेरी कृपा से मेरा हर काम होता है। दुनिया के सामने नहीं तेरे सामने झुकने से मेरा नाम होता है। चुनौतियाँ परेशानियों में तेरे नाम लेने से सब भाग जाते हैं। राम का नाम तुम्हें बेहद प्यारा है, उनका नाम सुनते ही तुम्हे आनंद आता है, जहाँ उनका कीर्तन चलता है, वहाँ तुम खुद पहुँच जाते हो। तुम राम लाला के प्यारे हो, और सीता के दुलारे हो। संतो को तुम प्यारे हो, अंजनियो॔ के तुम दुलारे हो। तुम राम की लम्बी आयु के लिए ख़ुद को लाल रंग से रंगते हो, तुम्हारे दिल मे सिया राम साथ खुद सजते हैं। तुमने सूर्य को फल समझ का खाया है, यहाँ तक की शनि को भी उसकी साढ़े साती याद दिलाई है। इसलिए तुम्हे नव ग्रह शीश झुकाते हैं। ©तुषार पाठक

मैदान कभी छोड़ना नहीं ©तुषार पाठक

 तुम मैदान छोड़ के मत जाना, हर निराशा में आशा ढूँढना, अर्जुन जैसे अपना लक्ष्य रखना, तो कर्ण के जैसे योद्धा बनना की भगवान को तुम्हारे लिए मैदान में आना पड़े, और वीर अभिमन्यु की तरह कभी खुद को कमज़ोर समझना नहीं, वहीं राम के जैसे शांत रहना, बस अपने पर विश्वास रखना। हर हार के बाद अपने आपको संभाले रखना, क्योंकि हर लड़ाई आख़िरी नहीं, आख़िरी लड़ाई वही है जहाँ आपने मैदान छोड़ दिया, और जहाँ हार निश्चित हो वहाँ लड़ना ज़रूर क्योंकि वहाँ जीतने का मज़ा ही अलग है, और हर हाल मे मुस्कुराते रहना, कह देना सभी से आज नहीं तो कल मै जीत के ही जाऊँगा। ©तुषार पाठक

क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ ©तुषार पाठक

न हूँ मै तेरे क्रश की तरह  न ही उसके जैसे दिखता हूँ , क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ।  नहीं आता मुझे लड़की पटाना  न ही उनकी बात समझता हूँ  न हूँ मैं उनकी आँखों का सितारा  पर हूँ मैं अपनी माई के लिए  दुनिया का तारा।  नहीं आता तेरी गुलाबी  होठों को पढ़ना , क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ । नहीं आता तेरी नशीली  आँखों से बचना, क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ।  नहीं हूँ मैं दूसरे जैसा जो  दिल मे होता है वह  कहता हूँ  पर जब तू सामने होती है  तोह वह भी कहने से डरता हूँ क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ।  न आता है मुझको  किसी का दिल तोड़ना , न किसके दिल के  साथ खेलना जनता हूँ, मैं जानता हूँ इश्क़ में  घायल हुए मरीजों को  इसलिए अपनी पंक्तियॉ   से उन पर मरहम लगता हूँ।  पर क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ।  ©तुषार पाठक

कोमल ©तुषार पाठक

 वह मेरी कोमल सी सास है,  वह मेरी कोमल अहसास हैं।  उसकी आँखे है कोमल,  और उसका मन है कोमल,  उसका गुस्सा हैं कोमल सा,  उसकी अदाय है कोमल सी उसकी आवाज़ है कोमल सी,  और उसका चेहरा हैं कोमल सा।  उसकी जुल्फे कोमल सी और उसके मुस्कुराहट कोमल सा।  वह कोमल पंख की तरह हैं,  और उसकी आत्मा कोमल पुष्प की तरह,  उसका नाम है कोमल!          © तुषार पाठक

आसान नहीं है पिता होना ©तुषार पाठक

 अपने लिए नहीं अपने परिवार के लिए जीना,  अपनी हर मुश्किलों से खुद ही लड़ना,  परिवार के हर संकट पर खुद अकेले जूझना।  वाकई आसान नहीं है, एक पिता होना।  अपने भविष्य के लिए नहीं अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना।  खुद के शौक पूरे करने से पहले अपने बच्चो के शौक पूरे करना।  अपने से अपने बच्चो को दूर रखना, वाकई आसान नहीं है पिता होना।  पिता के साथ एक बेटे और पति का भी फ़र्ज़ निभाना।  हर समस्या को शांति से, हँस कर हल कर देना,  और किसी समस्या को किसी को न कहना बस खुद में समेट लेना, वाकई आसान नहीं हैं पिता होना। ©तुषार पाठक

वह मेरे प्रिय रंग में रंग रही हैं ©तुषार पाठक

 जब से उसे यह मालूम हुआ कि मुझे लाल रंग बेहद पसंद है तब से वह मेरा लहू बन गयी है l अक्सर उसके होठ गुलाबी रहते थे, आज कल उसके होंठ  सिर्फ़ लाल ही नज़र आते हैं।  वह अकसर महीनों में एक बार लाल रंग की साड़ी पहनती थी, अब वही हर रोज़ लाल रंग के कपड़े मे नज़र आ जाती हैं।  जो लड़की हाथों पर मेहंदी लगने के बाद भूरे रंग के इंतज़ार में रहती थी, अब वही लड़की मेहंदी के रंग के लाल होने का इंतज़ार कर रही हैं।  जो पहले कभी बहुत नीले शांत सरोवर की तरह थी, अब वही लड़की लाल अंगार की तरह हैं!  जो कभी कलाई घड़ी पहन कर बाहर घूमने निकलती थी अब वही लड़की कलाई पर लाल रंग का धागा बांधती है।  जो लड़की  होली में हर रंग में रंग जाती थी, अब वही लड़की केवल लाल रंग में खूबसूरत दिखना चाहती हैं।  जो लड़की जो सिर्फ़ सफ़ेद रसगुल्ले खाती थी उसे अब लाल -लाल जलेबियाँ पसंद आने लगी हैँ ।  हाँ सच में वह लड़की मेरे प्रिय लाल रंग में रंग रही है। ©तुषार पाठक

२५वीं साल गिरह ©तुषार पाठक

 माँ पापा आप दोनों को, शादी की २५वीं साल गिरह की हार्दिक शुभकामनाएं l आपकी यह जोड़ी हमेशा, ऐसी ही बनी रहे, जिंदगी का हर पल हँसी, ख़ुशी और प्यार से बीते,  हर आने वाला दिन शुभ हो, हर तकरार मे भी प्यार दिखे!  आप दोनों ने जो कुछ मेरे लिए किया है उसको मैंने पन्ने पर उतरने की कोशिश की हैं,  एक ने मुझे विनम्रता सिखाई और दूसरे ने मुझे खुद के सम्मान का अर्थ बताया l एक ने मेरी सारी अभिलाषा पूरी की,तो दूसरे ने मुझे अपनी और दूसरों की अभिलाषा को पूरा करने के काबिल बनाया l एक ने अपने हाथ से खाना लिया और दूसरे के आपने हाथ से मेरी चोटों पर मरहम लगया l एक ने ज़िंदगी के सफ़र मे पहला कदम उठना सिखाया तो दूसरे ने ज़िंदगी मे अहम मोड़ पर l एक ने संस्कारों को मेरी ज़िंदगी मे बखूबी पिरोया, तो दूसरे ने संघर्ष को ही एक मात्र सत्य बताया l एक ने जिंदगी जीने का सही रास्ता दिखाया , तो दूसरे ने ज़िंदगी जीने के उसूल बताए l एक ने कर्म मे वीर बनाया,तो दूसरे ने धर्म मे धीर बनाया! एक ने खुद को पीछे रख कर, परिवार मे रहना सिखाया,तो दूसरे ने मुसीबत मे परिवार मे आगे रह कर लड़ना सिखाया l एक ने खुद के लिए कुछ नहीं ...

तुम आना... © तुषार पाठक

Sabse phele maa sharde ko namam aur saath mai maa lekhni ko namam mai apni rachna padhne ja raha hoo  तुम आना, पूरा करने मेरी अधूरी सी तस्वीर को, तुम आना, बदलने मेरी बदनसीब तक़दीर को। तुम आना मेरी ज़िंदगी का आख़िरी ख़्वाब बनकर,  मोहब्बत के शब्दों से लिखी कोई किताब बनकर। तुम आना, वो सुंदर चाँद बनकर जो रात की जगह, सुबह दिखाई देता हो, तुम आना, मेरे इतना क़रीब जहाँ तुम्हारी धड़कनों का शोर सुनाई देता हो। तुम मेरी ज़िंदगी के सफ़र में आकर, हमसफ़र बन जाना, मेरे भटके रास्तों पर तुम मंज़िल, तुम ही डगर बन जाना। मैं बहुत भटका हूँ ,तुम मुझको अपने दिल का पता बताना, मेरी ज़िन्दगी में आकर, ज़िन्दगी का नया अर्थ जोड़ जाना। चाँदनी से ढँके तुम्हारे चेहरे पर, सितारों जैसे आँसू लिए, तुमको मुसल सल सि सकते देखा है, सुना था आसमान में सिर्फ़ तारे टूटते हैं, पर आज तो मैंने खुद चाँद को भी टूटकर सिहरते देखा है! हाँ, तुम्हें खोने के डर से मैं अक़्सर रो देता हूँ,  तुम्हारी बाहों में, अपनी ज़िंदगी पिरो देता हूँ। तुम्हारे परिवार की सबसे बेशकीमती चीज़, 'तुम्हें' माँगना है, दिल से दिल तक मोहब्बत के मखमली धागे को बाँध...

आखिरी बाते ©तुषार पाठक

 एक सफ़ेद और कोरे काग़ज़ पर मेरी प्रिये तेरी कुछ बाते लिखते हैं,  तेरे मेरे कुछ बिताए हुए पल को मेरी कुंडली की  साढ़े साती की दशा मे राहु की अंतर्दशा का नाम देते हैं,  तेरी कही हर बात को दिल लगा कर सुनना और मेरी बाते को बिना सुने तेरा यूँ ही चले जाने को मेरी खामोशी का नाम देते हैं!  तूने जो झूठी कसमें मेरे लिए खाई थी,  अब वही कसमें तू किसी और के लिए खा रही हैं! तूने मेरे बाहों मे जो ज़िंदगी बिताने के सपने देखे थे, अब वही सपने तू किसी और की बाहों मे देख रही है!  तूने जो कभी मेरे लिए घड़ियाली आँसू  बहाए थे,  अब वही अमृत तुल्य आँसू तू किसी और के लिए बहा रही है!  तू कभी मेरे दिल के बनाए घर पर राज करती थी,  अब तू किसी और के दिलो- दिमाग़ की ज़रूरत बन गई हैं!  मै कभी तेरे आखों का कैदी था, अब तू किसी और की आँखो की मुज़रिम है!  तू कभी मेरे लिए किसी अधूरी कहानी का सारांश थी,  अब तू किसी और की ज़िंदगी का पूर्ण अध्याय है! ©तुषार पाठक

बनना चाहता हूँ ©तुषार पाठक

 मैं खुद को तुझे आँखो में उतार कर मोह्ब्बत का नशा करना चाहता हूँ, मै तेरी ज़िन्दगी की किताब का अच्छा किरदार बनना चाहता हूँ! मैं दुनिया को जीत कर तेरे प्यार में हारना चाहता हूँ! मैं ख़ुशी में तेरे चहरे की मुस्कराहट बनना चाहता हूँ,  और तेरे दुःख में तेरे आँखो का अश्क़ बनना चाहता हूँ! मैं तेरे अधूरे सपने की आख़री मंज़िल बनना चाहता हूँ। मैं तेरे कोमल हाथों की लक़ीर बनना चाहता हूँ! मैं तेरे ज़िन्दगी  के सफ़र में हमसफ़र बनना चाहता हूँ! मैं तेरे साथ बिताए हर पल को कैद करके कैदी बनना चाहता हूँ! मै तेरे संघर्ष में ख़ामोशी के वक़्त का शोर बनना चाहता हूँ! yeh meri kavikta ki akhri pakti padhta hoo मैं तेरी हर बात की चर्चा बनना चाहता हूँ! मैं तेरे हर दर्द की दवा बनना चाहता हूँ l      ©  तुषार पाठक

मैं तुम्हारा, तुम मेरी प्रिय ©तुषार पाठक

  Sabse phele maa sharde ko namam aur saath mai maa lekhni ko namam mai apni rachna padhne ja raha hoo  मैं चंद्रमा की रात-सा, तुम हो मेरी चकोर प्रिये, मैं उड़ती मदमस्त पतंग, तुम ‌हो मेरी डोर प्रिये। मैं शतरंज का राजा, तो तुम हो मेरी रानी प्रिये,  मैं शब्दों की माला तो तुम हो मेरी कहानी प्रिये। मैं कुल्हड़ की चाय, तुम हो कॉफ़ी महकती प्रिये,  मैं स्थिर सा एक पर्वत, तुम हो चिड़िया चहकती प्रिये। मैं मेहनत की बात, तुम हो उसका परिणाम प्रिये, मैं भागता काम-सा, तो तुम हो मेरा आराम प्रिये। मैं होठों की बात, तुम हो आँखों का ख़्वाब प्रिये, मैं उलझा एक सवाल, तुम हो मेरा जवाब प्रिये। मैं खोया इतिहास-सा, तुम मेरी हो भूगोल प्रिये, मैं लबों की ख़ामोशी, तू ही कुछ अब बोल प्रिये। मैं चुभता एक नश्तर-सा, तुम हो मेरी जंग प्रिये,  मैं दिवाली की जगमग तुम हो होली का रंग प्रिये। मैं हूँ एक अंश और तुम हो मेरी ज़िंदगी प्रिये,  मैं चलता कर्म-सा तुम धर्म की हो बंदगी प्रिये। yeh meri kavita ki akhri pakti padhta hoo मैं हूँ एक श्राप और तुम हो मेरा वरदान प्रिये, मैं हूँ तेरी धड़कन और तुम ह...

बेटे और पापा का रिश्ता ©तुषार पाठक

  कितना अज़ीब है न बेटा और पापा का रिश्ता, यहाँ प्यार से ज्यादा तक़रार दिखती है, लड़को को पापा से हज़ार शिकायत दिखती है, दोनों   में  इतनी नही बनती की आज तक पापा बेटे से  गले मिले हो । एक तरफ़ पापा की सख्ती में अपने बेटे को उसकी मज़िल तक पहुँचाने  की चाह छिपी होती है, तोह वही लड़को की ज़िद्द में उनके माँ पापा का नाम रोशन करने की इच्छा होती है। कितना दिलचस्प है न...  पापा और बेटे में फ़ोन पर बात २ मिनट से ज़्यादा नही होती। पापा का दिल पढ़ना किताब पढ़ने जितना आसान भी नही। पापा वह है जो दिल के अरमानों को बिना बोले पूरा कर देते है, पापा वह है जो अपने लिए कभी कुछ नही माँगते यहाँ तक की वह अपने लिए नही अपने बच्चो के लिए पाप करने के लिए तैयार रहते है। बेटा देखता है अपने पापा को वही पुराने कपड़े पहने हुए त्यौहार पर खुद के लिए छोड़ सब के लिए कुछ न कुछ खरीदेते हुए,वह भी चाहता है कि पापा की ख़्वाहिश को पूरा करे । कहते है न मुसीबत की क्या मज़ाल... पापा का साया ही काफ़ी है। पापा वह अनमोल हीरा है जिसका कोई मोल नही। पापा और बेटे का रिश्ता कुम्हार और कच्चे घड़े जैसा है.. कुम्हार की ठोकर...

युवा! © तुषार पाठक

 उनकी बातों को नही समझा जाता, न ही उनकी बात को महत्व दिया जाता है। उनको अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण निर्णय खुद नही लेने दिए जाते है। बस एक ही बार में उनको उनकी औकात दिखा दी जाती है, न ही उनके प्रतिभा को दिखाने का मौका दिया जाता है, उनकी असफलता पर उनका मनोबल गिरा दिया जाता है, उनको मन से हारने के लिए मज़बूर  किया जाता है। और उनकी किसी सफलता को  भाग्य से जोड़ दिया जाता है। उनको हर बात पर डाट दिया जाता है,वह पिसते रहते है, रिश्तेदारो से तो कभी  सरकारों से।  उनको हर किसी बात के लिए किसी न किसी चीज़ से डरा दिया जाता है। उनको हमेशा किसी और की गलती के लिए भी डाट दिया जाता है। उनकी  चुप्पी को उनकी कमज़ोरी समझा जाता है, उनके  लगतार प्रयासों को असफलता समझा जाता है। उनको रोने भी ठीक से नही दिया जाता , तुम लड़के हो ,तुमको आँसू  बहाने का हक नही। उनको उनके दोस्तों  से दूर किया जाता है, तोह उनको किसी लड़की से प्यार भी नही करने दिया जाता, धर्म-जाति  का ज्ञान दे दिया जाता है, उनकी काबिलियत को दहेज से तोला जाता है। वही उनका पेट तानो से भरा जाता है। उनके अंदर के ब...

सबकी होली एक जैसे नही होती ©तुषार पाठक

 होली ख़ुशी उल्लास का त्यौहार है। पर कितने ही लोगो के लिए यह एक त्यौहार का दिन नही बल्कि एक आम दिन की तरह होता है। होलिका दहन का दिन था, अभिराम को यह ज्ञात नही था कि, आज होलिका दहन है, उसे यह बात देर रात 10 बजे किसीके व्हाट्सअप  पर स्टेटस देखकर पता चली । तो वह फ्लैट पर दोस्तों के साथ कल के लिए योजना बनाने लगा। बाद में पता चला की कल शायद वह व्यस्त है। कल सुबह होते ही बिना कुछ खाए  वह कॉलेज के लिए निकल गया l क्लास  ख़त्म होते 12 बज गया। वह घर आया आते हुए उसने अपने लिए कुछ फल ले लिये क्योंकि आज उसके वहाँ खाना बनाने वाली छुट्टी  पर थी । 1 बजे उसे ईमेल आता है कि आपका आज ऑनलाइन इंटरव्यू 4 बजे है , घर आते है वह कुछ फल खाता है, और उसके बाद वह कॉल पर सबको विश करता है, वह जिसको जिसको फ़ोन करता है ,  कोई भी उससे अच्छे से बात नही करते, शायद इसमें गलती किसीकी भी नही सभी अपने कार्यो में व्यस्त है, या वह अपना दिन,  घर पर अच्छे से मना रहे है, यही सोच कर वह अपने मन को दिलासा देता है। उसके बाद वह इंटरव्यू  के लिए तैयार होने लगता है । इंटरव्यू ख़तम होते 4:45 हो जाता है।...

कुदरत का खेल !! ©तुषार पाठक

 किसी ने सही ही कहा है "जब आप के पास सुख है तो दुःख का आना तय है" यह कहानी है एक मध्य वर्ग परिवार की, एक माँ की वह कैसे रहती है, आज से 10-20 साल पूर्व माँ से ससुराल, रिश्तेदार सब को एक पुत्र की इच्छा होती थी। पुत्र न होने पर दुश्मनों से भी ज्यादा बुरा बर्ताव होता था। उस माँ ने एक नहीं 5 पुत्र दुनिया में आते ही चले गए। उस माँ के बारे में सोचिए उस पर क्या बीती होगी , जिसको कागज़  पर उतारना किसी के लिए संभव नही। कहते है ना " ऊपर वाला सब की सुनता है, उसने उस माँ की भी सुन ली। माँ इतनी महान होती है कि क्या बोलू , कि  जब वह अपने बचपन में पापा की यहाँ होती है तो,  वहाँ अपने शौक,सुख अपनी इच्छाये पूरी नही कर पाती है, ताकि उनके पापा का पैसा बच सके। बाद में वह शादी करके अपने पति के पास आ जाती है, तो वहाँ भी वह अपने पति के पैसे बचाती है आने वाले कल के लिए, अपने बच्चो के लिए, उनके अच्छे कल के लिए वह अपने सुख को अधूरा छोड़ देती है। ऐसा नही है कि वह अपने सुख   भोग नही सकती,पर माँ को अपने सुख पर भोग करना तभी अच्छा लगता हैं जब उसका बेटा अपने पैरों पर खड़ा हो, कमाता हो।  त...

माँ तू कैसे जान जाती है?? ©तुषार पाठक

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Sabse phele maa sharde ko namam aur saath mai maa lekhni ko namam mai apni rachna padhne ja raha hoo  मेरी पहली कविता मेरी माँ को समर्पित है जिसका शीर्षक है "माँ"    माँ तू कैसे जान जाती है??  तू दूर होकर भी मेरी आवाज़ से मेरी तबीयत जान जाती है, जो मेरे पास होकर भी नही जान पाते। तू कैसे जान जाती यह फोन तेरे बेटे ने ही किया है। तुझे कैसे पता चल जाता है मेरी  गलतियों का।। माँ तू  कैसे जान जाती है?? तू  कैसे जान जाती सबकी ज़रूत को, और सबकी आदतों को, तू  कैसे भूखे रहकर बाकी का पेट भर देती है, बहाने में कहती है कि तुझे भूख नही है। तू  कैसे अपने सपनों को छोड़ कर अपने  बच्चो का सपना पूरा कर लेती है, माँ तू  कैसे कर लेती  है?? बीमार होने पर भी स्वस्थ होने का बहाना बनाती है  और बीमार होकर भी घर का सारा काम  कर लेती है।। माँ तू सब के लिए दीवार बन खड़ी हो जाती है।। तू अपने को चुनने से पहले अपने परिवार को चुनती है माँ तू  कैसे कर लेती  है?? माँ तू  कभी अपने दर्द छुपाकर दूसरों का दर्द कम कर देती है। अपनी मदद करने से पहल...