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उसकी मोहब्बत ©सम्प्रीति

 नमन मां शारदे  नमन लेखनी उसके दिए हर ज़ख्म पर मरहम लगाती उसकी मोहब्बत, हाथ थामे साथ मेरा हरदम निभाती उसकी मोहब्बत। मेरे हिस्से के गम लेकर अपने हिस्से, हमेशा खुशियां मेरे हिस्से सजाती उसकी मोहब्बत। आगोश में उसके सब सही सा लगता है, मुझे मुझसा महसूस कराती उसकी मोहब्बत। बातों में उसकी सुकून का सहारा है, हर पल ये अहसास कराती उसकी मोहब्बत। उसका साथ जैसे कोई गहना सा है, लगाकर गले फिर मुझे सजाती उसकी मोहब्बत। छूअन उसकी मंदिर की पवित्र हवा सी है, छूकर मुझे फिर करीब ले आती उसकी मोहब्बत। विश्वास दिलाना, विश्वास कमाना एक तरफ है 'प्रीत', मुझे मुझपर हर रोज यकीन दिलाती उसकी मोहब्बत। ©सम्प्रीति “प्रीत”

कविता- ग़म तेरे आने का ©सम्प्रीति

नमन मां शारदे, नमन, लेखनी  ना ग़म तेरे आने का है, ना ग़म तेरे जाने का है। गुज़ारे थे जो लम्हें साथ, ग़म तो उनके गुज़र जाने का है। बड़े आराम से गुज़रे शाय़द अब ये ज़िन्दगी, पर ग़म अब तेरे ना सताने का है। रातें भी होंगी शायद अब सुकून भरी, पर ग़म तेरा ख्वाबों में ना आने का है। यादें तो क़ैद हो गई इन आँखों में, पर ग़म नज़रें ना मिल पाने का है। तुम तो आए और आकर चले गए, ग़म तो वक्त के ना ठहर पाने का है। ना ग़म तेरे आने का है, ना ग़म तेरे जाने का है। गुज़ारे थे जो लम्हें साथ, ग़म तो उनके गुज़र जाने है। ©सम्प्रीति

लेखनी दिवस निमंत्रण ©सम्प्रीति

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 ‘लेखनी’ ग्रुप कवि/ कवयित्रियों का सिर्फ एक समूह ही नहीं अपितु एक परिवार है, जो एक दूसरे को साहित्य के साथ-साथ स्नेह के बंधन से भी जोड़े हुए है। यह परिवार ना सिर्फ साहित्य का पाठ पढ़ाता है बल्कि जीवन से जुड़े पहलुओं को भी सिखाता है। यहां वरिष्ठ जनों से लेकर कनिष्ठ से भी सभी एक दूसरे का सम्मान करते हैं तथा उनकी बातों को, उनके सुझावों को हमेशा मान देते हैं व सर्वोपरि रखते हैं। ईश्वर हमारे इस लेखनी परिवार को हमेशा आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्रदान करें । धन्यवाद! ©सम्प्रीति

जब तुम मिले ©सम्प्रीति

नमन, माँ शारदे  नमन, लेखनी  चाँद भी फीका लगता है, पता चला  जब तुम मिले, रोशनी से ज्यादा कोई चमकता है, पता चला जब तुम मिले, तुम मिले तो पता चला मन ही मन मुस्कुराना क्या होता है, खुद में शर्माना भी कुछ होता है, प्यार से भी प्यारा कोई होता है, पता चला जब तुम मिले, तुम मिले तो समझ आया बैठे बैठे ख्वाबों में खो जाना क्या होता है, खुद ही खुद से बतियाना क्या होता है, अंधेरे भी खुबसूरत होते हैं, अहसास हुआ जब तुम मिले, हवाओं में संगीत होता है, पता चला जब तुम मिले, तुम मिले तो पता चला संगीत में किसी का झलक जाना क्या होता है, किसी में किसी का चेहरा भी नज़र आता है, किसी को पल भर देखना भी सुकून होता है,पता चला जब तुम मिले, तुम मिले तो पता चला इंतज़ार का भी एक अलग मजा होता है, किसी से दूर रहना भी सजा होता है, बेवजह बहाने बनाना भी कुछ होता है, पता चला जब तुम मिले, तुम मिले तो पता चला आंखों आंखों में भी बहुत कुछ होता है, फिर शरमा कर नज़रें झुकाना भी कुछ होता है, खुद में किसी का अहसास बसता है, पता चला जब तुम मिले, जब तुम मिले तो पता चला किसी में बेपनाह डूब जाना क्या होता है, इश्क सा गहरा द...

मैं और मेरा दिल ©सम्प्रीति

 चाहा तो नहीं था के कभी लिखूं तुझे..  पर ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं लिखने जा रही हूं,  जब छिड़ी है जंग कभी दिमाग की तुने उसे हराया है,  और हर बार मुझे सही रास्ते पे लाया है,  जाने कितने अहसान किए हैं तुने मुझे पर,  आज उन्हें गिनाने जा रही हूं, ऐ मेरे दिल आज तुझे मैं इस कागज पर उतारने जा रही हूं,  जब भी नकारात्मकता ने मुझे घेरा है,  तुने हर बार मुझे खुद से रुबरू कराया है,  आज उन्हें ही बयां करने जा रही हूं,  ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं लिखने जा रही हूं,  जब भी दुनिया ने नफरत के रास्ते पे मुझे मोड़ा है, तूने अक्सर खुबसूरत महोब्बत का अहसास मुझसे जोड़ा है, आज उसी महोब्बत को बरसाने मैं जा रही हूं,  ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं इस कागज पर उतारने जा रही हूं,  बाहरी दिखावे ने जब भी मुझे डराया है, तूने आकर हर बार मुझे सहलाया है,  उसी सहानुभूति को एक रुप मैं देने जा रही हूं, ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं लिखने जा रही हूं, अपने परायों के दर्द ने जब भी मुझे रुलाया है, तुने हर बार मुझे प्यार दिखाया है, आज उस प्यार को तेरे करीब ला रही हूं, ऐ मेरे दिल तु...

गद्य - तेरा आना ©सम्प्रीति

नमन, माँ शारदे  नमन, लेखनी    रेगिस्तान की धूप में शीतल जल-सा तेरा आना, अक्ष तेरा बनता हो जैसे मेरा ही आईना,  देखकर जिसे अक्सर ही भटक जाता हूं मैं, ऐसी सुंदर सी तुम एक मृगतृष्णा। देखो यूँ हंसा ना करो  अधरों को बंद ही रखो तो अच्छा, जो गालों पर गड्ढे हैं कयामत ढाते हैं, ठहर जाता हूं वहीं बनकर तेरा दीवाना, अक्ष तेरा बनता हो जैसे मेरा ही आईना। यूँ नज़रें मिलाकर मुस्कुराया ना करो धड़कनें ठहर जाती हैं अचानक ही, ये जो आँखें हैं जादू चलाती हैं बहक जाता हूँ मैं बनकर कोई परवाना, रेगिस्तान की धूप में शीतल जल-सा तेरा आना, कोई पूछे अगर मुझसे तेरा फ़साना याद आज भी आता है भीड़ से छिपकर हमारा अकेले मिल जाना, ज़िक्र तेरा अब भी करता है मुझे सबसे बेगाना, देखकर जिसे अक्सर ही भटक जाता हूं मैं ऐसी सुंदर सी तुम एक मृगतृष्णा। रेगिस्तान की धूप में शीतल जल-सा तेरा आना, अक्ष तेरा बनता हो जैसे मेरा ही आईना। ©सम्प्रीति

गुमशुदा ©सम्प्रीति

 जब-जब तुम्हें याद करुँ तो टिमटिमा देना बस, लगेगा जैसे साथ ही हो तुम बिलकुल मेरे पास, चलो ये भी मान लूँगी कि रात में दिखते हो, दिन भर काम करके रात को ही लौटते होंगे शायद, अच्छा..जब तुम्हें याद करके रोने लगूं, तो रोने मत देना,हाँ पर टूट भी मत जाना, तुम जहाँ हो अब वहाँ से नहीं खोना चाहती तुम्हें, बस एक बार की जगह दो बार टिमटिमा देना, मैं हँस दूँगी,देखकर तुम भी हँस देना, इन्तज़ार दिन भर करती हूँ कहीं बादलों के पीछे छिप ना जाना, मेरे साथ रहकर मेरी हर रात को यादगार बनना, अच्छा सुनो... मैं जब भी तुम्हें याद करुँ तो टिमटिमा देना बस, लगेगा जैसे साथ ही हो तुम बिलकुल मेरे पास। -©सम्प्रीति

ख्वाहिशें ©सम्प्रीति

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 किसी ने मुझसे पूछा कि इश्क लिखती हो महोब्बत है क्या किसी से? अब.. लिखती तो हूँ.. पर मेरी ख्वाहिशें पूरी कर सके ऐसा अभी कोई मिला नहीं, बहुत बड़ी ख्वाहिशें रखती हो शायद जो अभी तक कोई मिला नहीं, तो हमने कहा....... कि वफा करे हर हाल में ये ख्वाहिश तो नहीं, पर बेवफाई ना करे, एक ऐसा शख्स चाहिए... हर वक्त साथ रहे ये चाहत नहीं, पर जब हो तो बस मेरा ही हो, एक ऐसा शख्स चाहिए... नहीं चाहती कि बिन कहे सब समझ जाए, पर जब कहूँ कि i need you तो दौड़ा चला आए, रोऊं तो भले ही चुप ना करा पाए, पर 'मैं हूँ ना' कहकर झट से गले लगा ले, ऐसा शख्स चाहिए.. नहीं चाहती कि मेरे अलावा किसी से बात ना करे, पर दिल में बस मेरा ही नाम हो, एक ऐसा प्यार करने वाला चाहिए.. ख़ुशी सांझा करे ना करे, पर जब दुःखी हो तो बस मुझे ही याद करे, दुनिया के सामने प्यार जाहिर चाहे ना करे, पर अकेले में सीने से लगाकर 'सिर्फ तुमसे प्यार है' कहे, लोग चाहे जो कहें,  पर मेरे होने पर वो गर्व महसूस करे, और जो जबरदस्ती नहीं मेरी मर्जी को समझ सके, ऐसे दिल वाला चाहिए... ख्वाहिशों की list थोड़ी लम्बी है, तो शायद ऐसा कोई ना मिले, गर मिले ...

राही तू चलता जा ©सम्प्रीति

 तू चलता जा तू चलता जा, एक पल भी ना तू राह में रुक, रुका है तो थकान मिटा, रुक कर तू पीछे ना मुड़, मुड़ा है तो वापस ना लौट, कदमों को मोड़ मंजिल तक जा, वापस जो तू जाएगा खाली हाथ ही रह जाएगा, लौट के बुद्धु घर को आए कहावत गलत ठहराएगा, घर तुझे कोई ना मिले, अकेला तू रह जाएगा, मेहनत जो तू ना कर पाए, पेट अपना तक ना पाल पाए, ख्वाहिशों की जो झड़ी लगाए, सर उनके आगे झुकाएगा, मेहनत जो तू ना कर पाए, बेरोज़गार ही रह जाएगा, लोगों को ताक ताक कर  जीवन अपना बिताएगा, हर अपने से दूर होकर तू तिल-तिल मरता जाएगा, यथासंभव धरती का बोझ एक दिन जरूर कम कर जाएगा! -© सम्प्रीति

लेखनी स्थापना दिवस के उपलक्ष्य मेँ काव्य पाठ एवम मिलन समारोह ©सम्प्रीति

 कोई साथ हो तो कदम और भी मजबूत हो जाते है,ऐसे ही हमारा लेखनी परिवार है जिसका हर सदस्य एक-दूसरे के साथ खड़ा रहता है। लेखनी परिवार ने हमेशा सिर्फ प्यार ही बाँटा है। आप चाहे हर रोज रहें या हफ्ते में एक दिन हमारे इस परिवार में आपके नाम का प्यार हमेशा बरकरार रहता है। मुझे इस खूबसूरत परिवार का हिस्सा बनाने के लिए हृदयतल से सभी को शुक्रिया अदा करती हूँ। लेखनी के दो साल पूरे होने पर रखे गए कार्यक्रम में मेरी प्रस्तुति: © सम्प्रीति Video 1: Video 2: Video 3: Video 4:

जिंदगी के रंग © सम्प्रीति

 कभी-कभी जी भर कर हँसने का दिल करता है, और कभी-कभी बेवजह ही आँसूओं में डूब जाने का दिल करता है, कभी-कभी दिल कहता है कि क्या करना है जी कर छोड़ इस मतलबी सी दुनिया को मर जाते हैं सुकून से, पर कभी-कभी एक पल में सदियों जीने का दिल करता है, दिल टूटने से डर बहुत लगता है, पर कभी-कभी दिल कहता है कि छोड़ ये फिजूल बातें महोब्बत का जज़्बा एक दफा महसूस तो कर, कभी-कभी हर रिश्ता मतलबी सा लगता है, और कभी-कभी सारी परेशानियों का हल उन्हीं के साथ से मिलता है, कभी-कभी जिंदगी नीरस, फीकी सी लगती है, और कभी-कभी इतनी प्यारी की मधुमेह सा महसूस कराती है, इस हँसने, रोने, प्यार, नफरत अकेलापन और रिश्तेदारों की भीड़ सबको अपनाने का दिल करता है, इस हसीन कभी नीरस तो कभी प्यारी सी जिंदगी को दिल खोल कर जीने का दिल करता है।                                    - © सम्प्रीति

मैं और मेरा दिल ©सम्प्रीति

  चाहा तो नहीं था के कभी लिखूँ तुझे.. पर ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं लिखने जा रही हूँ, जब दिमाग की जंग छिड़ी है तो तुने उसे हराया है, और हर बार मुझे सही रास्ते पे लाया है, जाने कितने अहसान‌ किए हैं तुने मुझे पर आज उन्हें गिनाने जा रही हूँ, ऐ मेरे दिल आज तुझे मैं इस कागज पर उतारने जा रही हूँ, जब भी नकारात्मकता ने मुझे घेरा है, तुने हर बार मुझे अपने आप से रुबरू कराया है, आज उन्हें ही बयां करने जा रही हूँ, ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं लिखने जा रही हूँ, जब भी दुनिया ने नफरत के रास्ते पे मुझे मोड़ा है, तुने अक्सर खुबसूरत महोब्बत का अहसास मुझे दिलाया है, आज उसी महोब्बत को बरसाने मैं जा रही हूँ, ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं इस कागज पर उतारने जा रही हूँ, बाहरी दिखावे ने जब भी मुझे डराया है, तूने आकर हर बार मुझे सहलाया है, उसी सहानुभूति को एक रुप मैं देने जा रही हूँ, ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं लिखने जा रही हूँ, अपने परायों के दर्द ने जब भी मुझे रुलाया है, तुने हर बार मुझे प्यार दिखाया है, आज उस प्यार‌ को तेरे करीब ला रही हूँ, ऐ मेरे दिल तुझे आज मैं इन‌ कागज के पन्नों पर उतारने जा रही हूँ, मेरे प्यार‌ का एकलौता ...

चले आना मेरे हमदम..चले आना ©सम्प्रीति

 जब भी कभी मिलने का मन हो हमसे तो चले आना, चले आना यूँ सोच कर के कभी हम भी रात रात भर इंतजार किया करते थे तुम्हारा, और अगर हम "ना" कह भी दें फिर भी चले आना, चले आना ये सोच कर के ये "ना" बोलना तुम्हीं से सीखा है और अब बाकी उन पर हक है तुम्हारा, जिस दिन‌ गुजरे कोई रात तन्हाई में और याद हमारी तड़पाए तो चले आना, चले आना ये सोच कर के जाने कितनी रातें हमने भी काटी होंगी यूँ ही तन्हाइयों में बिस्तर पर करवटें बदल‌ बदल‌ के, जिस दिन‌ "मुझे मिलना है" छोड़कर "क्या वो मिलेगी" सोचने लगो तो चले आना, चले आना बस इतना समझकर की जाने कितने ही पल तुमसे मिले बगैर काटे हैं हमने, जिस दिन अपनी मर्जी छोड़कर हमारी मर्जी को समझने लगो तो चले आना, चले आना ये सोच कर के चलो रिश्ते पे पड़ी गर्दिश को साफ करते हैं दोनों मिलके, जिस दिन‌ "मैं" को छोड़ "हम" कहने लगो तो चले आना, चले आना ये सोच कर के आज भी तुम्हारी हमसफर बीच सफर में बैठी है इंतजार में सिर्फ तुम्हारे।                                             ...