नमन, माँ शारदे नमन, लेखनी महिना है फागुन का, दिन तेरस का आये बन वर पक्ष के अध्यक्ष नारद विवाह का न्यौता देने जाए। पंडित बने है ब्रह्मा, विष्णु कैलाश सजाएं, भस्म लगाकर तन पर भोले गौरी ब्याहने जाए। मुस्कुरा रहा शीश पर चंदा, जटाओं में गंगा नाचे गाये, पुष्प से सजा है नन्दी वासुकी हर्ष मनाए। चंद्राणी, ब्रह्माणी बन बहनें, रीति रिवाज रही निभाए, भूत प्रेत देवता दानव, बारात लिए सजाए। नाच रहे है बाराती, गण डमरू रहे बजाए, होकर नंदी पर सवार, शिव शक्ति ब्यहाने जाए। पहुंच गई बारात गौरी द्वार, नारद संदेश दिया पहुंचाए, उत्साहित गौरी की सखियां, गौरी का दूल्हा देखन आए। देखकर शंभू की काया, सखियां गई घबराएं, जाकर राजा रानी को सारा प्रसंग रही सुनाए। भाई मैनक द्वार खड़ा, शिव स्वागत की विधि कराए, पहुंच अन्तर्यामी गौरी की नगरी, गौरी को कैलाश ले जाने आए। मैना रानी महादेव को देखने की इच्छा जताए, देखने को शिव की काया, द्वार की ओर कदम बढ़ाए। धरकर विराट सा कुरूप, प्रभु मैना सबक सिखाए, करे रानी भोले की निंदा, नारद शिव महिमा गाये। बन गए भोले तेजस्वी युवक, मुकुट लिया सर पर सजाए, संसार बनाने वाले, खुद का संसार बसाने आ...