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वीणा वादिनी माँ ©सुचिता

 जय हे वीणा वादिनी माँ ! जय हे किरपा दायिनी माँ !    ज्ञान-अंजन मल नयन में . ज्ञान भर दे बुद्धि मन में । हर ले तम , तम नाशिनी माँ । जय हे , वीणा वादिनी माँ  । ताल-लय छंदो की रानी .. तू तो माँ वेदों की ज्ञानी । स्वर दे , सुर नव रागिनी माँ। जय हे , वीणा वादिनी माँ। चेतना दीपक जला कर .. शूद्र मानव का भला कर । शुभ्र-छवि हंस वाहिनी माँ । जय हे , वीणा वादिनी माँ ।   ©सुचिता

ज़िंदगी ©सुचिता

 डूबते  तो  कभी  हम  उभरते  रहे । रौ  में  दरिया  तेरे  यूँ  ही  बहते  रहे  इस तरह भी बसर  जीस्त करते रहे.. चोट  खाते  रहे  और   हँसते  रहे । ज़िंदगी की पढ़ाई मुसलसल रही .. इंतिहाँ  भी  ब-दस्तूर  चलते   रहे । काश और आस के जंगलो में फँसे .. जाने कब से तसलसुल भटकते रहे । रूक जा ऐ ज़िंदगी ठैर जा तू ज़रा .. छाले हम पा के, कब-तक यूँ सिलते रहे?  जी तो लेने दे उन लम्हों को भी कभी .. राह- ए-दिल से सदा जो गुज़रते रहे । रात यूँ याद आई किसी ख़्वाब की … गुफ़्तगू  चाँद  तारो  से  करते रहे  । ख़ैर है !  रौशनाई  रही  हाथ  में  … शुक्र हम तो , खुदा तेरा करते रहे । “सूचि” माने भी तो हार कैसे कोई … ख़्वाब पलको में कल के जो पलते रहे ।          © सुचिता

ये मौसम ©सुचिता

 ये बारिश का मौसम गुलाबी -गुलाबी  समाँ है  नशीला  , शराबी -शराबी  ।  निगाहें भी तेरी ,सवाली - सवाली … तो चेहरा मिरा भी ,किताबी- किताबी । अदा हाय ! ये शोख़ियाँ तेरी जानाँ .. दिलो में करें हैं , ख़राबी -ख़राबी   । हैं मदहोश सी , ये हवायें - फ़िज़ायें .. अज़ब सी है छाई , खुमारी -खुमारी । छिटकने लगी हैं ये ख़ामोशियाँ भी  तेरा इश्क़ तो है , जवाबी -जवाबी । झुका लो तुम अपनी नशीली निगाहें.. ये दिल हो न जाए , शराबी -शराबी  । फ़साना तो ये इश्क़ -ओ-हुस्न का है  ये दुनिया बहुत है , सवाली- सवाली ।   © सुचिता

इम्तिहाँ ©सुचिता

 यही  है इम्तिहाँ  तो इब्तिदा  क्या  है  तुम्हीं  बतलाओ  अब  ये माज़रा क्या है । दिलो में  जब  नहीं  है  क़ोई  भी  दूरी …… तो बतलाओ मियाँ , ये फ़ासला क्या है । बहुत नख़रे हैं ज़ालिम ज़िंदगी तेरे .. दुआ भी काम ना आई , दवा क्या है । लहू अश्को का दरिया बन के निकला है .. बता  मेरे  खुदा  तेरी  रज़ा  क्या  है  । अना के शाख़ पर कलियाँ मुहब्बत की .. यूँ ही गर सूख जाये , सोचना क्या है ।  बज़ा क्या है, ख़ता क्या है , सजा क्या है  सफ़र-ए-ज़िंदगी  तुझमें  बचा  क्या है |          ©सुचिता

ग़ज़ल ©सुचिता

कोई तस्वीर हर्फ़ों में उभरती है । महक फूलों की पन्नो में उतरती है । चमकते हैं कई जुगनू इन आँखो में.. शबे-ग़म यूँ ही  अश्क़ो से सँवरती है | उतरता है ज़मीं पर अक्स जब मह का .. नमी पलकों की कोई ख़्वाब बुनती है | मुसलसल रूठ जाना हो शग़ल जिनका .. वो क्या जाने दिलों पे क्या गुजरती है | कोई ख़ामोश है कुछ इस तरह लोगो .. पहेली और भी दिल की उलझती है | तुझी को ढूँढते हैं तुझ में गुम होकर .. शमा हर पल यूँ सुब्हो -शाम जलती है | कोई सदियों का बाबस्ता था तुझसे..जो.. मेरी  राहें  तेरे  दर  से  गुजरती  हैं   ।                                  ©सुचिता वर्धन 'सूचि'

ज़रूरी था ©सुचिता

 गुले- रूखसार खिलना भी ज़रूरी था ।। कड़ी थी धूप जलना भी ज़रूरी था ।। किनारों पे फ़क़त चलते भी तो कब तक .. समुन्दर में उतरना भी ज़रूरी था ।। फ़सानो के सराबों में रहें उलझे .. कोई मकतूब लिखना भी ज़रूरी था ।। तुझे यूँ याद करके थक गया है दिल.. कभी तो तेरा मिलना भी ज़रूरी था ।। ख़ुदाओं की निहायत बस्तियों में इन... कोई इंसान दिखना भी ज़रूरी था ।। ग़मों का बोझ कुछ मिन्हा हो जाता,इक ... ग़ज़ल शादाब कहना भी ज़रूरी था ।।                                 @succhiii

ग़ज़ल ©सुचिता

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 आज शाम भी है कुछ धुँआ-धुँआ  तेरी याद भी है यूँ रवाँ-रवाँ  ख़ुशबू तेरी आ रही हवाओं से  दिल को हो रहा ये क्यूँ  गुमाँ- गुमाँ  आँखें यूँ जगी -जगी सी सोई हैं  कोई रहता इनमें है निहाँ- निहाँ  आज भी पयाम आया  ना   तेरा  बुझ गया ये दिल , है बस निशाँ-निशाँ ज़ब्त-ए-ग़म से लब की खामुशी तलक  दिल का सौदा यूँ रहा ग़राँ- ग़राँ  तकती रहती  आँख क्यूँ सितारों को  तुझको अब भी कोई है गुमाँ-गुमाँ                                          @Suchita

ग़ज़ल ©सुचिता

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 ख़ुद को इतना भी ना तुम सताया करो  बेवजह भी कभी मुस्कुराया करो  हिज्र की शब हो या वस्ल के वसवसे  यूँ गुहर अश्क़ के ना लुटाया करो  धड़कनो में करे रक़्स जज़्बात जब  लिक्खो कोई ग़ज़ल गुनगुनाया करो बर्क़ सी यूँ दरकती है दिल में कहीं  यूँ ना आ -आ के यादों सताया करो  रोज़ मिलते हैं शम्सो-कमर यूँ कहाँ आबले पा के ना तुम दिखाया करो  छोड़, हर वक्त ये वक्त का मर्सिया आईने से ना ख़ुद को छिपाया करो  चाय, मौसम ये बारिश यूँ भी हो कभी  शाम रंगी धनक से चुराया करो                                                                       @Suchita