वीणा वादिनी माँ ©सुचिता
जय हे वीणा वादिनी माँ ! जय हे किरपा दायिनी माँ ! ज्ञान-अंजन मल नयन में . ज्ञान भर दे बुद्धि मन में । हर ले तम , तम नाशिनी माँ । जय हे , वीणा वादिनी माँ । ताल-लय छंदो की रानी .. तू तो माँ वेदों की ज्ञानी । स्वर दे , सुर नव रागिनी माँ। जय हे , वीणा वादिनी माँ। चेतना दीपक जला कर .. शूद्र मानव का भला कर । शुभ्र-छवि हंस वाहिनी माँ । जय हे , वीणा वादिनी माँ । ©सुचिता