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मृत्यु ©️रिंकी नेगी

 शरीर त्यागने के बाद, मुझे नहलाया जा रहा था |  जीवनपर्यन्त ना दिए दो जोड़ कपड़े किसी ने, अब नया कपड़ा, मोल कर लाया जा रहा था |  रो रहे थे वो लोग भी जो कारण रहे मेरे कष्ट का, जीते जी जो चल ना पाए साथ, आज वो हर व्यक्ति मृत शरीर को मेरे, दाह करने साथ जा रहा था | जीवन था तो भूख-प्यास थी मुझे, तब ना पूछा किसी ने मगर अब काक को भी नाम से, मेरे भोजन कराया जा रहा था |  मेरी आत्मा परेशान ना करे परिजनों को, इस डर से हर प्रथा का निर्वाहन  उनसे कराया जा रहा था |   जीवित रहते ना सुनी व्यथा किसी ने, पर हर कोई मुझको अपना बता रहा था | कोई ऑफिस की छुट्टी कोई सहानुभूति के लिए  मेरे किस्से सुना रहा था |  अधूरी कुछ जिम्मेदारियां, और अपनों के विचलित हृदय देखकर  मैं वापस लौट आना चाह रहा था |  पर आत्मा त्याग चुकी थी शरीर को, और मैं भी हर पल सांसारिक मोह से दूर जा रहा था | - ©️। रिंकी नेगी

स्त्री ©️रिंकी नेगी

 बेटी की शादी की खातिर,  प्रबंध महंगे करवाये थे।  शादी होकर सुसराल विदा हो  अरमान बहुत सजाये थे।  जितना भी कर सकते वो,  हर जतन उन्होंने लगाये थे।  और  जब विदा होकर गयी बेटी,  लगा जिम्मेदारी पूरी हो गयी।  पर यथार्थ कल्पना से परे ये शादी दुख लेकर आयी। रूई में सहजी गयी थी जो अबतक, उसके जीवन में पीडाओं की लहर आयी।  कुछ समाज के ठेकेदारों के बीच पड़ी बेहद दुखद उसने घड़ी पायी। ना मिला पति का स्नेह उसे, ना मिला कोई सुखी संसार ।  उलाहनों और यातनाओं के बीच, उलझ गया उसका घर-संसार । करती दिन भर काम अनेक, रातों को आंसू वो थी बहाती । घर के छोटे भी करते अपमान, वो बिन कुछ बोले सहती जाती। महीने बीते, बीते साल,  पर दुःख में कमी ना आयी। खिलखिलाकर हंसती थी जो अक्सर,  ग्रीष्म के पुष्प सी वो मुरझायी। फिर भी ना माने ये लोभी लोग जरा, ना जाने कितनी आत्मा उसकी दुखायी। शारीरिक मानसिक सब दर्द दिये, कोई भी कसर नहीं बचायी। और आवाज उठती जब दिखी, मायके में संस्कारों की कमी ही बतायी। कहते स्त्री ही स्त्री की दुश्मन, ये कहावत यथार्थ करके दिखायी। जो दु...

कविता ©रिंकी नेगी

 हर ओर कोलाहल मचा, हर ओर चीख-पुकार है । वेदना समझे न कोई, असहाय पर होते अत्‍याचार है । ढूढ़े पथिक सारथी, मिलती किंतु दुत्‍कार है । सर्वश्रेष्‍ठ कैसे बने यहाँ केवल इसी पर करते सभी विचार है । अन्‍याय का है बोल-बाला, न्‍याय न जाने छिपा किस द्वार है । ज्ञान का अनुचित प्रयोग, अज्ञानियों को दे रहा शक्ति अपार है । रक्‍त से भी खेल जाये, ये कैसे विचित्र चित्रकार है । सर्वश्रेष्‍ठ कैसे बने यहाँ केवल इसी पर करते सभी विचार है । बाहृय आडम्‍बरों से, परिपूर्ण समाज अन्‍याय के विरूद्ध करता नहीं चीत्कार है । स्‍वयं की थाली भरता जाये पर, किंतु गरीब भूख से ही बेहाल है । निर्लज्ज है मानव इतना की अब, मानवता भी शर्मशार है । सर्वश्रेष्‍ठ कैसे बने यहाँ केवल इसी पर करते सभी विचार है । घुट-घुट कर कट रहा, मानव जीवन बेहद बेहाल है । समाज में अच्‍छाई को ओढ़े हुए, ना जाने कितने अपवित्र विचार है । -©रिंकी नेगी

अधूरा सफर ©रिंकी नेगी

  सुबह जैसे ही सुप्रिया चिकित्सालय पहुंची। वार्ड बॉय सुप्रिया को बताता है कि सिस्टर कल रात को ऑक्सीजन सप्लाई रूक जाने के कारण कोविड़ वार्ड वाले मरीजों की मौत हो गयी । वार्ड बॉय की बात सुनकर सुप्रिया सुन्न रह जाती है और जल्दी से कोविड़ वार्ड में जाकर देखती है कि कही उनमें अभिनव भी तो नहीं।   सुप्रिया प्राइवेट चिकित्सालय में स्टाफ नर्स के पद पर पदस्थ थी। जहां कोविड़ वार्ड के मरीजों को अटेंड करने के लिये उसकी ड्यूटी लगी थी। कोविड़ वार्ड में अपनी सेवायें देती थी। उसी वार्ड में एक दिन एक मरीज आया "अभिनव"। अभिनव सुप्रिया के स्कूल का सहपाठी था और सुप्रिया के जीवन का प्रथम आकर्षण भी । कोविड़ हो जाने के कारण अभिनव की हालत काफी गंभीर हो गयी थी। सुप्रिया ने जैसे ही अभिनव को देखा उसे सभी पुरानी बातें याद आने लगी कि कैसे वो एक-दूसरे के साथ समय व्यतीत किया करते थे। पर स्वयं पर नियंत्रण रखते हुये सुप्रिया ने अभिनव के ईलाज हेतु समस्त आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया करना शुरू कर दी थी। चिकित्सक की सलाह अनुसार वो अभिनव का पूरा ध्यान रखती किंतु अभिनव की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा था। सुप्रिया क...

बरखा रानी ©️रिंकी नेगी

तपती धरा की प्यास बुझाने  अपना मधुर संगीत सुनाने  सबके मन को शीतलता पहुँचाने ये घटा सुहानी लायी होगी  हौले-हौले छम-छम करती  बरखा रानी आयी होगी  सूखी डालियों को फूलदार बनाने सूखी सरिताओं को पुनर्जीवन दिलवाने ये घटा सुहानी लायी होगी  हौले-हौले छम-छम करती  बरखा रानी आयी होगी  अब हर जगह हरियाली होगी किसानों के मुखमण्डल पर लाली होगी  प्रेमियों के दिल में प्रेम की ज्योत जगाने  सबके मन को आनंदित कर जाने  ये घटा सुहानी लायी होगी  हौले-हौले छम-छम करती  बरखा रानी आयी होगी  मयूर के नृत्य से मोहित होकर  जीवन में नव संगीत भर जाने  सूर्य के तेज से बचाने  मानव जीवन को राहत पहुँचाने मन को माटी की सुगंध का एहसास दिलाने  चातक पक्षी की प्यास बुझाने  ये घटा सुहानी लायी होगी  हौले-हौले छम-छम करती  बरखा रानी आयी होगी  अब घरों के आस-पास जल स्त्रोत भर जायेंगे छोटे-छोटे नन्हें हाथ  कागज की कश्ती तैरायेंगे  गर्मी की उमस के बाद  पुनः पुष्प सुगन्धित आएंगे  जिसे देखकर पक्षी सारे मधुर ध्व...