माँ.. ©शशिकांत
माँ.. जो मुझे मुझसे नौ महीने ज्यादा जानती है।। माँ.. जिसे बना कर वो ईश्वर भी रोया होगा, की अब उसकी पूजा कम होगी इस माँ के सामने।। माँ.. एक ऐसा शब्द जो एक अक्षर का होते हुए भी पूरे ब्रह्मांड को खुद में समा ले।। माँ.. जिसकी आंचल ने ज़िन्दगी के थपेड़ों से बचाया।। माँ.. दूसरों की लाडली होने से लेकर खुद अपने बच्चो पर लाड लुटाने वाली महिला का सफर, माँ कहलाया।। @Shashi Kant