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तोमर छंद - महाभारत युद्ध ©के एम कौस्तुभ

नमन माँ शारदे नमन लेखनी छंद - तोमर चरण - 4 (2-2 चरण सम मात्रिक) मात्रा - 12 अंत - गुरु, लघु (SI) अनिवार्य कलक्रम - 2+7+3 (SI) शीर्षक - महाभारत युद्ध  कर धनुष बाजू पट्ट ,  धरु मारु बोलहिं भट्ट । बह रही शोणित धार , पर करें जय जयकार । गज भिड़हिं गज सों आय , धरि चरण पटकहिं धाय । बिन मुण्ड धड़ बिन सुंड , फटि परहिं ज्यों दधि कुण्ड । सब वीर महिमा मण्ड , शर घालि कर शत खण्ड । भिड़ परहिं होकर कुद्ध , कर रहे भीषण युद्ध । असि चलहिं विद्युत चाल । करि छिन्न ग्रीवा भाल ।  तम छा गया घनघोर ।  रण क्षेत्र गुंजित शोर ।   © के एम " कौस्तुभ "

गीत- प्यास ©के एम "कौस्तुभ"

नमन, माँ शारदे नमन, लेखनी लोलुप मन तुमको समझाऊँ , मत प्याली विष ढार । तेरी प्यास न मिटने वाली , मिट जाए संसार । उदर दरी के वादे भूले,  जन्म लिया झूले में झूले। पुष्ट हुआ माया को बाँधे, मन मचला अब नभ को छूले । जोड़ रहा है पाई-पाई , यह नश्वर व्यापार ॥ 1 ॥     हर पल केवल पाप समेटा , अंत चिता पर जाकर लेटा । तेरे-मेरे  के   घेरे   में , फँसकर इस जीवन को मेटा । जो बोया है मिल जायेगा , रहता नहीं उधार ॥ 2 ॥ सोच अभी भी प्रभु चरनन की , नैया पार लगे जीवन की, पीछे तू कुछ कर नहिं पाये, जब पत्री आएगी यम की । जिन पर यह तन हवन किया क्या , ले जायेंगे पार ॥ 3 ॥ ©के एम "कौस्तुभ "