ग़ज़ल ©अंजलि

तेरे ज़िक़्र के कफ़स में कैद तेरी याद होगी,

मिलेगी रिहाई जब तुझसे मुलाकात होगी।


कशिश से सजे हैं तेरे मक़तूबों के अल्फा़ज,

देखा जिस पल नज़र भर,क्या सौगात होगी।


तेरे बिना बेचैन,अकेली लगती है स्याह रातें,

तू जो हुआ साथ अगर क्या हसीं रात होगी।


इंतजार में हूँ हमारी मोहब्बत की बरसात के ‌,

तू जो छू ले ख़ालिस उल्फत सी बरसात होगी।


अक़ीदत के असास से साथ गुज़रेगी जिंदगी,

रूख्सती के बाद भी आख़िरत तेरे साथ होगी। 

©अंजलि

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