कुछ बातें ©शैव्या मिश्रा

चंद बातें कही नहीं जाती, 

बिन कहे भी रही नहीं जाती l


कोरे काग़ज़ पे ये लिखीं नज़्मे...

हर किसी से पढ़ी नहीं जाती l


रोज़अखबार देख लेते हैँ.. 

क्या करें तिश्नगी नहीं जाती l


अब्र धरती पे बरस पड़ते हैँ.. 

दूरियाँ ज़ब सही नहीँ जाती l


पंख टकरा के बिखर जाते हैँ 

अब उड़ाने भरी नही जाती l

                     ©शैव्या मिश्रा

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