गीत ©सरोज गुप्ता

 जय जय जय महिषासुर मर्दिनी

रूप अनूप देखाई । 

कइस बखान करुअ मैं मूरख

सबद मिलत नहिं माई ।। 


 कंचन वरन, नयन अनुरंजित

ओंठ पुहुप मुस्काई, 

कानन कुंडल, नथ नकुनन मा

मांग सिंदूर लगाई ।। 


शंख गदा तिरसूल लिए माँ

घातक बन ललकारी, 

सिंह चढ़े रजनीचर मारे

कोप भरहिं फुफकारी ।। 


वासर रयन दिवस पखवाड़े

विनती करूँ तोहारी, 

करहुँ कृपा अब मात भवानी,

कष्ट हरो महतारी ।।

   

©सरोज गुप्ता

टिप्पणियाँ

  1. अहा!!! अति सुंदर एवं सुमधुर स्तुति 🙏🏼💐

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  2. वाह बहुत सुंदर स्तुति💐
    जय माँ दुर्गा🙏

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  3. मनभावन, स्तुत्य माता स्तुति।

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  4. सुन्दर गीत मैंम 🙏🍃

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