आञ्जनेय छंद - हनुमान वंदना ©रश्मि शुक्ल 'किरण'

नमन माँ शारदे

नमन लेखनी 

आञ्जनेय छंद 

११ वर्ण १६ मात्राएं


राम नाम जप करते प्यारे

कष्ट हरें हनुमान हमारे।।


रवि को लील गए फल जाना।

जै जै जै हनुमत बलवाना।।

वेद धर्म के हनुमत ज्ञाता।

कष्ट निवारक सुख के दाता।।

राम नाम नित धुनी लगाई।

भक्ति आपकी है फलदाई।।

राम राम प्रभु राम पुकारे।

कष्ट हरें हनुमान हमारे।।


नाम आपका अति सुखकारी।

नाथ हरो मम संकट भारी।।

जनक दुलारी की सुधि लाए।

मारि मारि खल मारि गिराए।

प्राण लखन के नाथ बचाए।

ले कर बूटी हनुमत आए।।

सेवक हनु हैं राम दुलारे।

कष्ट हरें हनुमान हमारे।।


चित्त शुद्धि करते हनुमाना।

रुद्र अंश भगवान सुजाना।।

दीन बन्धु के आप सहायक।

संकट मोचन सेना नायक ।।

निर्मल जन को कंठ लगाए।

छलिया कपटी कभी न भाए।।

आन खड़े हम प्रभु के द्वारे  ।

कष्ट हरें हनुमान हमारे।।


कृपा करें कपि हैं दुख हर्ता।

मंगल मूरत मंगल कर्ता।।

लाल सिंदूरा बदन लगाए।

बैठ गए प्रभु ध्यान लगाए।।

रक्षा करते हनुमत देवा।

राधव की करते नित सेवा।

राम नाम भव सागर तारे।

कष्ट हरें हनुमान हमारे।।


दीप जलाकर शीश नवाऊँ।

कीर्तन भजन आरती गाऊंँ।।

मंगलवार सु-मंगलकारी।

शनि के बजरंगी उपचारी।।

रामदूत हे! मारुति नन्दन।

पुष्प चढ़ाऊंँ करती वंदन।।

भोग लगे नित सांँझ सकारे।

कष्ट हरें हनुमान हमारे।।


©रश्मि शुक्ल 'किरण'

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही सुन्दर और व्यवस्थित वंदना है।
    बहुत बहुत बधाइयाँ।

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  2. सम्माननीय पटल का हृदय से असीम आभार 🙏🙏

    जवाब देंहटाएं

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