गीत- श्रीकृष्ण ©रानी श्री

नमन, माँ शारदे 

नमन, लेखनी 



सदा मटकी फोड़ जाए,

वस्त्र ग्वालिन के चुराए,

गोपियों के संग कान्हा,

रास कैसा यह रचाए।

रास रचते हैं लुभावन।

आ गए हैं देखो मोहन।


पंख मस्तक पर लगाए,

बाँसुरी सुंदर बजाए,

बैठ यमुना के किनारे,

श्यामसुंदर मुस्कुराए।

हो रही है मधुर गुंजन,

आ गए हैं देखो मोहन


छुपके-से माखन को खाए,

माँ यशोदा को सताए,

हैं सभी लीलाएँ नटखट,

तभी लीलाधर कहाए।

संग ले मासूम बचपन,

आ गए देखो हैं मोहन।


कंस का वह काल लाए,

तर्जनी पर गिरि उठाए,

दीनबंधु बने हैं कान्हा,

भक्त को दुख से बचाए।

बने रक्षक नंदनंदन,

आ गए हैं देखो मोहन।


आस्था हिय में जगाए,

मुख में रखते जग समाए,

अति ललित मुस्कान धरकर,

राधिका जी संग आए।

है प्रफुल्लित देख यह मन,

आ गए हैं देखो मोहन।


©रानी श्री

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