आ गये कैसे ©रानी श्री

 वज़्न- 1222 1222 1222 1222



हमें परहेज़ सबसे थी, खबर में आ गये कैसै।

अभी तो रात पूनम थी,सहर में आ गये कैसे।


बहारें दूर से बस लौट आती छोड़कर जिसको,

ख़िज़ां में फूल ये देखो,शजर में आ गये कैसे।


किसी ने भी नहीं देखा, किसी को इश़्क फरमाते,

ज़माना ही बता दे फ़िर,नज़र में आ गये कैसे।


न थे उस्ताद ही ऐसे कि सबको मात  दे दें हम,

ख़ुदा जाने,न जानें हम, असर में आ गये कैसे।


उन्हें तो गांव के दिन रात भाते थे कभी 'रानी',

कि अब तू  देख ले उनको, शहर में आ गये कैसे।


~©रानी श्री

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