गजल © विपिन बहार

 मौत ये अब खुदा पर टली जा रही ।

जिंदगी जानलेवा चली जा रही ।।


एक ताइर हुई यार यूँ जिंदगी ।

यूँ कफ़स में कही अब पली जा रही ।।


कौन अजमत करें कौन खिदमत करे ।

दूर तक बस यही खलबली जा रही ।।


मखमली दिलरुबा पास आओ जरा ।

आरजू आस की यूँ जली जा रही ।।


देख ले आसमाँ, देख ले कारवाँ ।

बारिशों में कही मनचली जा रही ।।


लोग क्यों मतलबी से लगे है यहाँ ।

बात मुझको यहीं अब खली जा रही ।।


© विपिन"बहार"

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