सलीका © रजनी सिंह
अपनों की आग से छुपता मेरा सलीका ।
ड़रा सहमा सा है लुकता मेरा सलीका ।।
तसलसुल ख़िज़ां से उबता मेरा सलीका....
एतिमाद आंच पे पकता मेरा सलीका ।
पयम्बरों के सहीफे जैसा मेरा सलीका....
जहानें ज़ीस्त में फैलता मेरा सलीका ।
हनूज नहीं रो पाया जो मेरा सलीका....
रोज-ओ-शब है तड़पता मेरा सलीका ।
तुर्बत में अब ये जाएगा मेरा सलीका....
गर्दिश के कूचे निकलता मेरा सलीका ।।
तस्कीन से बंधे कब तक मेरा सलीका....
खालीक से सवाल पूछता मेरा सलीका ।।
@ रजनी सिंह
वाह बेहतरीन पेशकश 👌👌👌
जवाब देंहटाएंवाह बेहद खूबसूरत पेशकश 👌👌👌
जवाब देंहटाएंWow... Beautiful...👌✨✨
जवाब देंहटाएंAmazing 🔥🔥🔥
जवाब देंहटाएंbeautiful 👌👌
जवाब देंहटाएंवाह.... 💐💐
जवाब देंहटाएंWaah khoobsurat gazal ma'am 👌👌👌👏
जवाब देंहटाएंबेहतरीन अल्फ़ाज़ 💕👌👌👌
जवाब देंहटाएंआप सभी का हृदयतल से धन्यवाद
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