गीत- हिंदुस्तानी सेना ©सुविधा पंडित
वीर/आल्हा छंद
कुल मात्रा 31,
16,15 पर यति
अंत गुरु लघु अनिवार्य
हिंदुस्तानी सेना आई, महाकाल का ले अवतार।
सिंह गर्जना से गीदड़ के, झुंडो में है हाहाकार।।
कायर ने बेटी बहनों की, माँगों से पौंछा सिन्दूर।
उसकी ही माटी में खूँ की, खेलेंगे होली भरपूर।।
केसरिया बाने में निकले, तीनों सेनाओं के शेर।
दिन गिन लो प्रतिशोध-अगन में, स्वाहा करने भर की देर।।
देश प्रेम की ज्वाला उर में, दहके आँखों में अंगार।
धर्म युद्ध यह कलयुग का है, चलता पुनः 'सुदर्शन चक्र' ।
हर कुत्सित चेष्टा को रौंदा, रिपु की हुई दृष्टि जो वक्र।।
चींटी-सा मसला ड्रोनों को, अफ-सोलह कर शक्ति विहीन।
रक्षा कवच बेध कर अरि का, दशा बना दी है अति दीन।।
साहस हिम्मत के हाथों में, हम लेकर चलते हथियार।
गौरवान्वित हूँ आज स्वयं पर, जन्मभूमि मम हिंदुस्तान।
नाम सुनेगा भविष्यत में तो, काँपेगा थर-थर शैतान।।
इस माटी ने जने सदा ही, लुटे देश पर वीर जवान।
सिन्दूरी संकल्प हमारा, तन न्योछावर माँ की शान।।
उपद्रवी आतंकी की अब, शर्मनाक निश्चित है हार।
©सुविधा पण्डित
अत्यंत उत्कृष्ट, ओजपूर्ण छंदबद्ध गीत है।🙏जय भारत, जय भारत की सेना🙏
जवाब देंहटाएंअत्यंत ओजपूर्ण एवं समसामयिक आल्हा छंद सृजन 👏👏👏
जवाब देंहटाएंजय हिन्द जय हिन्द की सेना 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
अत्यंत ओज पूर्ण एवं उत्साहवर्धक छंद सृजन 💐🙏
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