गीत- प्यास ©के एम "कौस्तुभ"

नमन, माँ शारदे
नमन, लेखनी

लोलुप मन तुमको समझाऊँ ,
मत प्याली विष ढार ।
तेरी प्यास न मिटने वाली ,
मिट जाए संसार ।

उदर दरी के वादे भूले, 
जन्म लिया झूले में झूले।
पुष्ट हुआ माया को बाँधे,
मन मचला अब नभ को छूले ।
जोड़ रहा है पाई-पाई ,
यह नश्वर व्यापार ॥ 1 ॥
   
हर पल केवल पाप समेटा ,
अंत चिता पर जाकर लेटा ।
तेरे-मेरे  के   घेरे   में ,
फँसकर इस जीवन को मेटा ।
जो बोया है मिल जायेगा ,
रहता नहीं उधार ॥ 2 ॥

सोच अभी भी प्रभु चरनन की ,
नैया पार लगे जीवन की,
पीछे तू कुछ कर नहिं पाये,
जब पत्री आएगी यम की ।
जिन पर यह तन हवन किया क्या ,
ले जायेंगे पार ॥ 3 ॥

©के एम "कौस्तुभ "

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