गीत- नीड ©गुंजित जैन

नमन, माँ शारदे

नमन, लेखनी

विधा- गीत

आधार छंद- मुखड़ा, समांत सरसी छंद एवं अंतरा सार छंद


सरसी छंद (विषम पद मात्रिक छंद)

विधान-

मात्रा-२७, 

यति - १६,११

चरणान्त - SI 

विशेष – सरसी = चौपाई(१६) + दोहा का सम चरण(११)

सार छंद (विषम पद मात्रिक छंद)

विधान-

मात्रा-२८, 

यति - १६,१२

चरणान्त - SS

 



भोजन हित भटका जीवन भर, किन्तु मिला संताप।

नीड छोड़कर उड़ता नभचर, करता रहे विलाप।


छोड़ गया अपने परिजन को, नभ में पर फैलाने,

क्षण-क्षण रहकर दिखते मन को, मुख जाने-पहचाने,

स्मृतियों का विस्तृत अम्बर, नहिं पाता है नाप।

नीड छोड़कर उड़ता नभचर, करता रहे विलाप।


नन्हे शिशु के मुख में दाने, डाल नहीं पाया है,

चिंतातुर मजबूर पिता ने, हिय को समझाया है,

कैसे पहुँचे इतनी ऊपर, नन्ही मृदु पद-चाप।

नीड छोड़कर उड़ता नभचर, करता रहे विलाप।


व्याकुलता लेकर निज मन में, खग चिंतित रहता है,

पीड़ा लिए अनंत गगन में, सूर्य ताप सहता है,

झरते झर-झर अश्रु निरंतर, रवि से बनते भाप।

नीड छोड़कर उड़ता नभचर, करता रहे विलाप।

©गुंजित जैन

टिप्पणियाँ

  1. अहा, सुन्दर गीत बन पड़ा है बन्धु 👏👏

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  2. अत्यंत भावपूर्ण सार्थक सार-सरसी छंदाधारित गीत भैया🙏🍃

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  3. अत्यंत संवेदनशील एवं भावपूर्ण गीत सृजन 💐

    जवाब देंहटाएं

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