नमन माँ शारदे नमन लेखनी छन्द- सार छंद (विषम पद मात्रिक छंद) विधान- मात्रा-२८, यति - १६,१२ चरणान्त - SS दीन-हीन मैं नाथ अकिञ्चन, द्वार तुम्हारे आया। आर्द्र नयन, आहत अन्तर्मन, पास तुम्हारे लाया। तुम असीम, मैं बिन्दु मात्र हूँ, तुम सागर मैं धारा। मेरी लघुता को प्रभु अपना, दे दो अमित सहारा।। पतझड़ में ज्यों सूखा पत्ता, सङ्ग पवन के बहता। अन्तहीन सम मरुथल में मैं, अपनी पीड़ा सहता।। तुम हो अडिग हिमालय स्वामी, मैं नगण्य रज कण हूँ। तुम जीवन हो प्राण जगत के, मैं क्षणभङ्गुर क्षण हूँ।। जैसे तृषित कपिञ्जल पाखी, घन की राह निहारे। वैसे ही दो नयन प्रतीक्षा, करते द्वार तिहारे।। काल-चक्र की द्रुत धारा में, तिनके सा बहता हूँ। मौन व्यथा के कारागृह में, घुट-घुट कर रहता हूँ।। शून्य हृदय के इस मरुधर पर, करुणा-मेघ गिरा दो। जनम-जनम की अमिट तृषा पर, कृपा कटाक्ष फिरा दो।। मिटा सको तो मुझे मिटा दो, चाहे अंङ्क लगा लो। शरणागत हूँ मेरे भगवन्...
बहुत सुंदर भावपूर्ण 👌👌👌🌺🌺
जवाब देंहटाएंअति सुंदर एवं सटीक 💐💐💐💐
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर .....वाह्ह्ह्ह्ह
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर🙏
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर .....वाह्ह्ह्ह्ह 👌👌
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