गजल ©विपिन बहार

 भूख खोजें बेतहाशा नून रोटी दाल को ।

गाँव मे आए विधायक पूछते है हाल को ।।


छप्परों से आँसुओ की बूंद टपकी जा रही ।

काम मंत्री जी करेंगे अब नए ही साल को ।।


आग जो फ़ैली तुम्हारा घर जला सकती कभी ।

गर नही समझें मियाँ तुम इस सियासी चाल को ।।


शान-शौकत ,चार पीछे लोग है अब आपके ।

जानते है हम विधायक आप के भौकाल को ।।


तुम शिकंजी पी रहे हो राजशाही ठाठ में ।

भूख से बेचे गरीबी रोज अपने खाल को ।।


दोस्त मेरे दोष मुझकों आप मत देना कभी ।

एक शायर कह रहा बस आप के ख्याल को ।।

©विपिन बहार

टिप्पणियाँ

  1. बहुत उम्दा ग़ज़ल भईया जी🙏🙏

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