माँ ©माधुरी मिश्रा
माँ
तेरी ममता की छाँव तले
सूरज की तपिश कुछ भी तो नहीं।
तू निर्मल, शीतल, पावन इतनी
गंगा, अमृत तो कुछ भी नहीं।
तेरे प्यार भरे स्पर्श से ही
भूल जाती हूँ मैं गम सभी।
तेरी हौसलों भरी बातें देती है
मुझे धैर्य, हिम्मत और सहनशक्ति।
तेरी आँखों में गहराई इतनी
सागर की जैसे थाह नहीं।
तेरा हृदय विशाल है व्योम-सा
तू अंधियारे की प्रथम किरण।
ये नभ, ये जग, सारी सृष्टि
निर्जीव अथवा हो जीवधारी,
इस प्रकृति की विशिष्ट कृतियाँ
तेरी तुलना में कुछ भी तो नहीं।
तुझमें ही सभी का वास है
तेरे संग हर लम्हा खास है।
'माँ' तू मेरे जीने की वजह
बिन तेरे 'मधु' कुछ भी तो नहीं।
@श्रीमती माधुरी मिश्रा

I have no words for this..
जवाब देंहटाएंधन्यवाद तुषार जी।🙏🙏🙏
हटाएंनिशब्द
जवाब देंहटाएंमाँ के लिए कुछ भी कहा जाए वो कम ही है
वाकई अनीता जी। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका प्रतिक्रिया के लिए।😊🙏🌹
हटाएंबिल्कुल सही लिखा है आपने मां के लिये ...मां के बिना बच्चे का कोई अस्तित्व नहीं ...बहुत सुन्दर पंक्तियां 👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंधन्यवाद प्रिय सरोज जी।😊🙏🌹
हटाएंबहुत सुन्दर पंक्तियां मां के लिये 👌👌
जवाब देंहटाएंधन्यवाद प्रिय सरोज जी।😊🙏🌹
हटाएंह्रदयस्पर्शी 🙏🙏
जवाब देंहटाएंबहुत-बहुत आभार, नमन संजीव जी। 😊🙏🙏
हटाएंBahut Sundar👌👌
जवाब देंहटाएंबहुत-बहुत धन्यवाद आपका।😊🙏🙏
हटाएंBahut hi Khoobsurat likha h ma'am or utne hi acche se picture ke sath use darshaya h👌👌👏❤️
जवाब देंहटाएंधन्यवाद। पिक्चर का श्रेय तुषार जी को जाता है।😊🙏🙏
हटाएंNice
जवाब देंहटाएंधन्यवाद आपका।😊🙏🙏
हटाएंमाँ को समर्पित अमूल्य कृति 💕👌👌👌
जवाब देंहटाएंधन्यवाद प्रिय दीप्ति जी। 😊🙏🌹
हटाएंआप सभी का हृदयतल से धन्यवाद
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