मैं और मेरी कलम ©रेखा खन्ना

 जब मैं लिखती हूं तो मेरे अंदर का शोर काग़ज़ पर आता है उतर

मन के दरवाजे से चुपके से कलम मेरे जज़्बात चुरा लेती हैं।


मेरे अंदर की तन्हाइयां, बैचेनीयां, गिले-शिकवे और तड़प

सब काग़ज़ के कानों में कह देती हैं गुपचुप

मैं जो नहीं कह पाती हूं उसे लिखते हुए आंसू बना‌ लफ्जों का रूप देती हैं।


मेरे अंदर का शोर अक्सर पूछता है मुझसे 

क्यूं इक्कठा कर रखा मुझे अपने अंदर तुम ने ऐसा क्या है जो खाए जा रहा अंदर ही अंदर तुम्हें।


कभी-कभी मेरी कलम भी हो जाती हैं बेबस

जब दिल का कोई बंद दरवाजा नहीं खुलता उससे।


कुछ एहसास दिल के तहखाने में भी हैं बंद

शायद इक उम्र से भाग रही हूं उनसे पीछा छुड़ाने को।


कलम हर बार इसी कोशिश में लगी रहती हैं इक बार कह दूं तो शायद मिले कुछ सुकून।


डरती हूं शायद आंखों के सामने सब कुछ ना जी उठे इक बार फिर

भागती हूं और छिप जाती हूं अपनी कलम से बच कर

पर कलम भी मेरे सब अड्डे जानती है छुपने के।


मैं बेशर्म हूं या कलम हैं ठीठ यह भी सोचती हूं अक्सर 

मैं बताना नहीं चाहती और वो मेरा पीछा ही नहीं छोडती।


फिर भी ना जाने कैसे पढ़ लेती हैं हाव-भाव और उतार-चढ़ाव मेर चेहरे के

लिख जाती हैं सब-कुछ मेरे लाख बार ना ना कहने से भी।


कलम हैं मेरी पक्की राजदार पर कभी कभी राज खोल देती हैं

बस मुझे सुकून में देखने को हर बात काग़ज़ को बोल देती हैं।


अक्सर जब भी रूसवाइयां, वेदना, कड़वाहट और ज़ख्मों के अंधेरे आते हैं मुझे निगलने को

मेरी कलम मेरा हाथ पकड़ खींच लाती हैं रौशनी में।


जब भी अपने काले पड़े काग़ज़ को देखती हूं तो लगता है‌ जैसे मेरी अंदरुनी करहाटों को सुन मेरी कलम अपना काला लहू बहा रही हैं और वो धीरे धीरे काग़ज़ पर ही सूख गया है।


मैं और मेरी कलम जैसे सुख-दुख के साथी है।

वो मुझे पहचानती है और मैं उसका सहारा लेती  हूं खुद को पहचानने को।


                                                                           @ रेखा खन्ना

टिप्पणियाँ

  1. अत्यंत भावपूर्ण पंक्तियां 👌👌

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  2. अत्यंत भावपूर्ण पंक्तियां 👌👌

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  3. अत्यंत भावपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी 💕👌👌

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  4. Waah behad khoobsurat mam...kagaj or kalam ka rishta hi anokha hota h 👌👌👏

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  5. आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद

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