अब चलना होगा ©नवल किशोर सिंह

अब चलना होगा 


नयन उनींदे खोल, बीन लो सपन सुहाने ।

करके पग गतिमान, पास मंज़िल है लाने॥

लाखों पथ में शूल, तुम्हें वो दलना होगा ।

लेकर मन में ठान, पथिक अब चलना होगा॥  


आहत होंगे पाँव, बींधकर रक्त बहेगा ।

जाने कितने भाव, रोक ये कदम कहेगा ॥

घातों को सब जान, छली को छलना होगा ।

लेकर मन में ठान, पथिक अब चलना होगा॥  


रजनी के उस पार, आग का धधके गोला।

जग में हो उजियार, दाँव पर उसका चोला ॥

सूरज बन चुपचाप, तुम्हें अब जलना होगा ।

लेकर मन में ठान, पथिक अब चलना होगा॥


निर्झर से जल पात, दूर है बहकर जाता ।

गिरने की ही सीख, पास सागर के लाता ॥

जड़ जंगम हिमखंड, उसे अब गलना होगा ।  

लेकर मन में ठान, पथिक अब चलना होगा॥  

                                          --©नवल किशोर सिंह

टिप्पणियाँ

  1. वाह
    पथिक अब चलना होगा
    प्रेरक रचना

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह सुंदर और प्रेरणा जनक रचना
    अद्भुत सर जी🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. अति उत्तम एवं सार्थक संदेश देती हुई रचना 👌👌👌🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

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