लेखनी कुटुंब ©आकांक्षा तिवारी

 दोहा ग़ज़ल गीत सब विधाओं का रूप अनंत हैं 

 लेखनी के पटल पर छाया आज वसंत हैं 

 आप सब के गुणों की सारा जग चर्चा करे 

 साहित्य के अनमोल रत्न भाव यह वर्षा करे 

 

 बुद्धि वैभव आत्मबल में वृद्धि प्रभु कीजिये 

 साहित्य समर्पण हिंदी सेवा को नई दिशा दीजिये

 काव्य सृजन की वीथिका से हम सब कवि बने 

 साहित्य सेवा में लीन हो रोज इक नया रवि बने 


 आप सब की लेखनी सर्वत्र हैं अविराम हैं 

 हे !लेखनी के गुणीजनों कोटि कोटि प्रणाम हैं

                                                       @ Akansha tiwari

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर पंक्तियां लेखनी कुटुम्ब के लिये 👌👌👏👏👏

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  4. अति सुंदर पंक्तियाँ एवं अति सुंदर भाव 💕👌👌👌

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  5. आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद

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