तोटक छंद - आशुतोष वंदना ©रजनीश सोनी
नमन माँ शारदे
नमन लेखनी
तोटक छंद
वर्णिक छंद, सलगा × 4 (IIS×4)
रुचि ब्याल कराल सु माल गले।
शुचि बालक चन्द्र ललाट भले।।
लट छोर जटा अटवी जिनके।
शिव का अनुराग जगे सबके।।
द्युति भाल विशाल त्रिनेत्र लसे।
विषपुच्छक कुण्डल कर्ण फॅसे।।
भव तारणि जान्हवि शीश झरे।
मन शंभु सदा अनुराग भरे।।
डमरू डमकार निनाद करें।
कर शस्त्र विशेष त्रिशूल धरें।।
कटि में अजिनाम्बर ही पहने।
शिव शंभु रहें उर में अपने।।
हर आसन ब्याघ्र सु-चाम करें।
वृष- वाहन संग सदा विचरें।।
बस भूत भयङ्कर हैं जिनके।
मन रे.! शरणागत हो उनके।।
रति-नाह विदाहक मान हरें।
जग के हित में विषपान करें।।
भय -मुक्त रहें नित ध्यान धरें।
हिय में प्रभु का अनुराग भरें।।
शिव के सँग शैलसुता विलसें।
षड़आनन गोद गणेश हँसें।।
गिरि पावन धाम निवास करें।
शिव 'नेह' अलौकिक आस भरें।।
©रजनीश सोनी
अत्यंत उत्कृष्ट तोटक छंद आधारित आशुतोष वंदना। सुंदर प्रवाह, शब्द संयोजन🙏
जवाब देंहटाएंअति उत्तम छंद बद्ध स्तुति 💐💐🙏🏻
जवाब देंहटाएंअतिसुन्दर भावपूर्ण स्तुति सर जी 🙏💐
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