दोधक छंद- विवाहोत्सव ©ऋषभ दिव्येन्द्र
आप सभी को लेखनी परिवार की ओर से विवाह पंचमी की असंख्य शुभकामनाएँ।
प्रभु श्री राम और माता जानकी कृपा दृष्टि बनाये रखें।
नमन माँ शारदे
नमन लेखनी
छन्द– दोधक
विधान- ३ भगण+२ गुरु (SII SII SII SS)
राम सिया छवि भावन न्यारी। सुन्दर रूप सुहावन प्यारी।।
साँवर राम सिया बड़ गोरी। पा न सकी उपमा मति मोरी।।
मध्य सभा सिय राम विराजे। मोहक वाद्य लुभावन बाजे।।
आलि सुमंगल गीत सुनाये। मंजुल कोकिल कंठ लजाये।।
मोह रहा यह रूप सलोना। हर्षित है हिय का हर कोना।।
पण्डित पाठ करें हरषायें। दोउ महीपति भी सुख पायें।।
मंडप राज रहे सब भाई। चारण भाट सुमंगल गाई।।
कौशिक संग वशिष्ठ विराजे। राज पुरोहित मंगल काजे।।
हर्षित हैं सिय मात सुनैना। नेह भरी छवि दृष्टि चितैना।।
वेद पढ़ें सब पण्डित आए। रूप मनोहर प्राण बसाए।।
वेद जिसे कह "नेति" बुलाये। वर्णन मूढ़ अबोध सुनाये।।
चित्त सदा छवि नाथ सुहाई। दास करे विनती रघुराई।।
दोहा
सीता के अपसव्य में, शोभित प्रभु श्रीराम।
संग सदा सौमित्र के, रहें उर्मिला वाम।।
मुदित मंगला मांडवी, मन्मथ भरत कुमार।
शत्रुहंत श्रुतकीर्ति के, बनें प्राण आधार।।
©ऋषभ दिव्येन्द्र
अति सुंदर मनभावन सृजन
जवाब देंहटाएंबहुत धन्यवाद आपका 🤗🙏
हटाएंअत्यंत मनहर एवं जीवंत चित्रण 💐🙏
जवाब देंहटाएंधन्यवाद आपका 🤗🙏
हटाएंबहुत सुंदर छंद सृजन
जवाब देंहटाएंबहुत-बहुत धन्यवाद 🤗🙏
हटाएंलेखनी परिवार को हृदय से आभार 🥰🙏
जवाब देंहटाएंअत्यंत उत्कृष्ट सृजन ऋषभ 👏👏
जवाब देंहटाएंसुंदर मनहर सृजन , अंत में दोहा क्या खूब पिरोया 👏👏
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