संदेश

लेखनी दिवस प्रतियोगिता २०२५ - लेखनी परिवार

चित्र
ग़ज़ल, नज़्म प्रतियोगिता नियमावली - ग़ज़ल या नज़्म का दिया गया विषय है “सियासत”। आप ग़ज़ल में “सियासत” लफ़्ज़ को रदीफ़, क़ाफ़िया, या किसी मिसरे के किसी भी लफ़्ज़ की तरह प्रयोग में ले सकते हैं या “सियासत” लफ़्ज़ को उनवान बनाकर नज़्म कह सकते हैं।  - ग़ज़ल में काफ़िया (तुकांत) एवं रदीफ़ (पदांत) शाइर अपनी स्वेच्छा अनुसार रख सकता है एवं ग़ज़ल का बा-बह्र होना अनिवार्य है।  - नज़्म का उनवान के इर्द-गिर्द होना अनिवार्य है।  - निर्णायक मंडल लेखनी परिवार से ही होगा एवं निर्णायक मंडल के सदस्य इस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएंगे। उनके सिवा कोई भी, किसी भी उम्र का लेखक प्रतियोगिता में भाग ले सकता है। - ग़ज़ल या नज़्म का स्वरचित एवं अप्रकाशित होना अनिवार्य है। - निर्णायक मंडल का निर्णय  अंतिमहोगा। -लेखक गण अपनी ग़ज़ल/नज़्म 4 सितंबर 2025 रात्रि 12 बजे से पहले लेखनी की मेल आई.डी.- lekhanisahitya@gmail.com पर अपने परिचय के साथ भेजें। - विजेता ग़ज़लकारों/नज़्मकारों को लेखनी परिवार की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किये जाएंगे एवं उनकी ग़ज़ल/नज़्म उनके परिचय के साथ लेखनी के आगामी संकलन में प्रकाशित होगी। छंद, कविता, गीत एवं...

कविता- ये बारिशें क्यों मुझे ढूंँढती हैं? ©रेखा खन्ना

नमन माँ शारदे नमन लेखनी वो खिड़की के बाहर से  भीतर झांँकती हुई  बारिश की बूँदों का मुझे देख कर मचलना और वो मेरे भीतर की  बारिश का ना थमना,  कितना मुश्किल है  मौसमी बारिशों में  बे-मौसमी बारिश को बरसने से रोकना। ज्यादा गीली कौन सी बूंदें हैं,  बताओ?  वो जो बादलों से बरसी हैं  या फिर वो जो आँखों से छलकी हैं?  एक सिर्फ़ जो पानी हैं  या वो जो सिर्फ़ जज़्बातों को बयां करती हैं? ये बारिशें क्यों मुझे ढूंँढती हैं?  क्या है मेरा और इनका रिश्ता? कुछ बादल  कुछ घटा थोडा़ पानी  बहुत सारे एहसास  एक रिश्ता  बहुत गहरा लगाव कुछ बूँदें पर तरसता मन का आसमां  एक ख्वाहिश भीगूँ मैं भी  बारिश की बूंँदें मुझे भिगोएं कैसे? भीतरी बारिशों से सराबोर मैं कोई कोना सूखा नहीं  जिसे भीतरी बारिश ने छुआ नहीं  मौसमी बारिश कहे  कभी तो मुझे थोड़ा सा सूखा मिल मैं कहूँ, कभी तो भिगो मुझे  जब मैँ भीतरी बारिशों से नाराज़ रहूँ कुछ सूखी कुछ गीली सी मैं  मौसमी बारिशों में भीगने को तरसती रही  खिड़की के बाहर से  ...

गीत- घिरी बदरिया काली-काली ©ऋषभ दिव्येन्द्र

नमन माँ शारदे  नमन लेखनी             घिरी बदरिया काली-काली! तप्त धरा पर बनकर आँचल, भरें  चौकड़ी  ये दल-के-दल, मानो कोई हिरणी चलती, चाल चपल चंचल मतवाली!             घिरी बदरिया काली-काली! आतुर   भू  के   आलिङ्गन  को, व्याकुल दिखते महि चुम्बन को, झूम-झूम  के  रोर  मचाते, बरसावन  रसधार  निराली!             घिरी बदरिया काली-काली! श्याम   घनेरे  घन   बरसेंगे, सब के सब सुख से सरसेंगे, नीरस कण्ठ अधर मुरझाए, तृप्त कहो क्या होंगे आली?             घिरी बदरिया काली-काली! ©ऋषभ दिव्येन्द्र

गीतिका छंद- शौर्य गीत ©रश्मि शुक्ल 'किरण'

नमन माँ शारदे नमन लेखनी   छंद -गीतिका चरण- 4, दो दो चरण समतुकांत कुल मात्रा- 26 तीसरी, दसवीं, सत्रहवीं, चौबीसवीं मात्रा लघु अनिवार्य।  यति 14,12 चरणान्त लघु गुरु। वीर सैनिक भारती के, हो रही जयकार है। शौर्य गाथा सैन्य दल की,कह रहा संसार है।। कुछ निहत्थों पर चलाई,शत्रुओं ने गोलियांँ। खेलने सैनिक चले तब,खून की हैं होलियाँ।। मौत से वो खेलते हैं,जान की बाजी लगा। पस्त करते दुश्मनों को,शत्रु रह जाता ठगा।। याद बरसों तक रखेंगे, यूंँ भरी हुंकार है। शौर्य गाथा सैन्य दल की,कह रहा संसार है।।१। हम युगों से ही अमन की,बात करते आ रहे। मान जा ए खल जिहादी,हम तुझे समझा रहे।। पालते आतंक को जो,पा रहे देखो  सजा। अब न रोकी धृष्टता तो,युद्ध ही समझो रजा।। पापियों को जो मिटाए,राष्ट्र का शृंगार है। शौर्य गाथा सैन्य दल की,कह रहा संसार है।। ध्वज सदा लहरा रहा है,भारती की शान में। जाँ लुटाते सुत सुता हैं,भारती की आन में।। आखिरी चेतावनी है,पाक बतला दें तुम्हें। है तबाही हर तरफ ही,शौर्य दिखला दें तुम्हें।। सुन विजय की नाद प्यारे,जीत की टंकार है। शौर्य गाथा सैन्य दल की,कह रहा संसार है।।३।। ©रश्मि शुक्...

गीत- हिंदुस्तानी सेना ©सुविधा पंडित

वीर/आल्हा छंद कुल मात्रा 31,  16,15 पर यति अंत गुरु लघु अनिवार्य हिंदुस्तानी सेना आई, महाकाल का ले अवतार। सिंह गर्जना से गीदड़ के, झुंडो में है हाहाकार।। कायर ने बेटी बहनों की, माँगों से पौंछा सिन्दूर। उसकी ही माटी में खूँ की, खेलेंगे होली भरपूर।। केसरिया बाने में निकले, तीनों सेनाओं के शेर। दिन गिन लो प्रतिशोध-अगन में, स्वाहा करने भर की देर।। देश प्रेम की ज्वाला उर में, दहके आँखों में अंगार। धर्म युद्ध यह कलयुग का है, चलता पुनः 'सुदर्शन चक्र' । हर कुत्सित चेष्टा को रौंदा, रिपु की हुई दृष्टि जो वक्र।। चींटी-सा मसला ड्रोनों को, अफ-सोलह कर शक्ति विहीन। रक्षा कवच बेध कर अरि का, दशा बना दी है अति दीन।। साहस हिम्मत के हाथों में, हम लेकर चलते हथियार। गौरवान्वित हूँ आज स्वयं पर, जन्मभूमि मम हिंदुस्तान। नाम सुनेगा भविष्यत में तो, काँपेगा थर-थर शैतान।। इस माटी ने जने सदा ही, लुटे देश पर वीर जवान। सिन्दूरी संकल्प हमारा, तन न्योछावर माँ की शान।। उपद्रवी आतंकी की अब, शर्मनाक निश्चित है हार।  ©सुविधा पण्डित

लेखनी मास प्रतियोगिता परिणाम

चित्र
सभी को सादर नमन। जैसा कि सभी को ज्ञात है, लेखनी परिवार द्वारा आयोजित लेखनी मास प्रतियोगिता का आयोजन 28 मार्च 2025 से 25 अप्रैल 2025 तक हुआ। इसके अंतर्गत लघुकथा/कहानी प्रतियोगिता, कविता प्रतियोगिता, गीत प्रतियोगिता एवं छंद प्रतियोगिता में हमारे पास कई रचनाएँ आईं जो उत्कृष्ट थी, संग्रहणीय थीं। निर्णय करना अत्यंत कठिन था किंतु नियमानुसार निर्णय लेना आवश्यक था। विजेताओं की सूची इस प्रकार है। क) लघुकथा/कहानी लेखन प्रतियोगिता-दिनांक 28 मार्च 2025 से 4 अप्रैल 2025  लेखनी परिवार से विजेता:- 1. आ० गुंजित जैन जी 2.  आ० लवी द्विवेदी 'संज्ञा' जी 3. आ० सौम्या शर्मा जी अन्य विजेता:-  1. आ० कार्तिक अग्रवाल जी 2. आ० मधु झुनझुनवाला 'अमृता' जी 3. आ० अनन्या तिवारी जी विशिष्ट:- आ० ऋतिका चौधरी जी आ० सृष्टि स्वरूपा जी आ० धीरेंद्र "सोंटी" जी आ० सफ़ी सिद्दीक़ी जी ख) कविता लेखन प्रतियोगिता-दिनांक 4 अप्रैल 2025 से 11 अप्रैल 2025 लेखनी परिवार से विजेता:- 1. आ० ऋषभ दिव्येन्द्र जी 2. आ० लवी द्विवेदी जी 3. आ० सौम्या शर्मा जी अन्य विजेता:-  1. आ० सुविधा पंडित जी 2. आ० अनन्या तिवारी जी 3. आ० क...

छंद लेखन प्रतियोगिता - लेखनी मास प्रतियोगिता

चित्र
  लेखनी मास प्रतियोगिता के अंतर्गत अगली प्रतियोगिता के रूप में लेखनी परिवार लाया है छंद प्रतियोगिता। छंद का विषय है - श्रीकृष्ण नियमावली:- केवल 25 अप्रैल 2025, 11:59 PM से पहले भेजी गई रचनाएँ ही मान्य होंगी। आप केवल एक छंद रचना भेज सकते हैं। आपकी छंद रचना का स्वरचित होना अनिवार्य है।   प्रतिभागी अपनी छंदबद्ध रचनाएं वर्ड फ़ाइल के रूप में लेखनी की मेल आई डी- lekhanisahitya@gmail.com पर शीर्षक, लेखक के नाम और सम्पूर्ण पते के साथ भेज सकते हैं। इसके अतिरिक्त छंद का नाम एवं विधान भी डालना अनिवार्य है। दिए गए विषय को ही शीर्षक बनाना अनिवार्य नहीं, किन्तु छंद का दिए गए विषय पर होना अनिवार्य है। आप अपने अनुसार शीर्षक दे सकते हैं। ध्यान रखें कि आपकी रचना में किसी प्रकार की अश्लीलता या अभद्रता न हो और किसी समुदाय या धर्म विशेष को आहत न करती हो।