ग़ज़ल ©रजनीश सोनी
वन्दे वागेश्वरी
नमन लेखनी
ग़ज़ल
बे-वजह के उसूल क्यों कुबूल हम कर लें।
फूल सी जिन्दगी कैसे बबूल हम कर लें।।
जो बुलाते हैं गजल गीत शायरी के लिये,
चाहते हैं खरा पैसा वसूल हम कर लें।
लोग इजहार करेंगे मगर है ना-मुमकिन,
दोस्ती जाने बिना क्यों फिजूल हम कर लें।
नेक नीयत रहे तो लोग तबज्जो देगे,
खुदा की राह पे खुद को रसूल हम कर लें।
देख पाकीज़गी भी चीज कोई होती है,
गुलबदन है इसे कैसे के धूल हम कर लें।
"नेह" नैनो में किसी के समा गये हैं जब,
ये मुनासिब नही कि और भूल हम कर लें।
©रजनीश सोनी "नेह"
बेहद खूबसूरत गज़ल 💐🙏🏼
जवाब देंहटाएंबेहद उम्दा ग़ज़ल सर🙏
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