मरहटा छंद- गुरु ©ऋषभ दिव्येन्द्र

गुरु पूर्णिमा की असंख्य शुभकामनाएं💐


नमन माँ शारदे

नमन लेखनी

छंद- मरहटा छंद

कुल मात्रा- 29, 

10,8,11 पर यति। पहली एवं दूसरी यति समतुकांत

दो-दो या चारों चरण समतुकांत।

चरणान्त- गुरु लघु अनिवार्य


यह सत्य सनातन, बात पुरातन, नहीं जगत गुरु ठौर।

चेतन के स्वामी, बहु पथ गामी, बदलें जीवन तौर।।

विद्यावानों के,  धी मानों के,  वेद  व्यास  सिरमौर।

इनके सम ज्ञानी, बहु विद्वानी, कहाँ धरा पर और।।


©ऋषभ दिव्येन्द्र

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आञ्जनेय छंद - हनुमान वंदना ©रश्मि शुक्ल 'किरण'

वो दौर ©सूर्यम मिश्र

अक्सर भूल जाते हैं ©दीप्ति सिंह

लेखनी स्थापना दिवस के उपलक्ष्य मेँ काव्य पाठ एवम मिलन समारोह ©अंजलि