आलोचना महामानव की... ©सूर्यम मिश्र

 गाल पे हाथ लगाए अरि 

ऐसी वो माँ का लाल नही 

क्षमा किंतु हे राष्ट्रपुत्र अब 

वैसा कोई गाल नही 


क्यों एक चौरा-चौरी पे था 

असहयोग को रोंक दिया?

खुद लेकर आगे आए फ़िर 

आग में सबको झोंक दिया?


भगत सिंह लटके फाँसी पे 

क्यूँ कुछ भी ना कर पाए?

भारत माँ के अमर मान का 

समझौता करके आए?


और बताने लगूँ अगर तो, 

घोर रात हो जाएगी

छोटा मुँह है कुछ भी बोलूँ 

बड़ी बात हो जाएगी


शांतिपूर्ण जीवन की आशा 

में अब कौन नही होता? 

पर प्रश्नों का उत्तर गाँधी 

केवल मौन नही होता


गीदड़ जब गजराजों का 

संबोधन करने लगते हैं

श्वान सिंह के सिर पर चढ़ 

उद्बोधन करने लगते हैं 


जब सब गर्दे मिलकर 

हाटक राख बताने लगते हैं 

पटबिजने सब मिलकर रवि को 

आँख दिखाने लगते हैं 


लहू से सींची गई भूमि जब 

परती जोती जाती है 

माता के आँचल पर जब भी 

कालिख पोती जाती है 


तब-तब हे गाँधी जी हिय में 

शक्ति जुटाना पड़ता है 

जब धर्म-युद्ध ही हो जाए तब 

शस्त्र उठाना पड़ता है

  © सूर्यम मिश्र

टिप्पणियाँ

  1. Itna ucch vichar late kaha se ho guru 🙏👍👍👍sabdo ke bhndr m baithe h lgta h 😊😊😊sabdo ke proyog atyant shi dhng se krte h aap 😊😊😊😊😊

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह , शानदार शैली
    जिंदाबाद लाइन...

    बहुत खूब ❣️🌺

    जवाब देंहटाएं
  3. सूर्यम भैया इस पर ये ही कह सकते है
    छोटा मुँह है कुछ भी बोलूँ

    बड़ी बात हो जाएगी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अत्यधिक धन्यवाद और आभार...अवाक् कर दिया आपने मेरी पंक्ति का प्रयोग मेरे ही उत्साहवर्धन के लिए करके..😊🙏

      हटाएं
  4. बहुत खूब लिखा 👏👏
    छोटा मुॅंह है कुछ भी बोलूॅं
    बड़ी बात हो जायेगी
    👏👏👏👏🌹🌹

    जवाब देंहटाएं
  5. अद्भुत , सटीक प्रश्न करता हुआ सृजन..... बहुत बहुत बधाई 💐😊🙏😊

    जवाब देंहटाएं
  6. पर प्रश्नों का उत्तर गांधी केवल मौन नही होता����
    जब धर्म युद्ध ही हो जाए तब शस्त्र उठाना पड़ता है����
    अतिसुंदर रचना!!!

    जवाब देंहटाएं
  7. Suryam Mishra अद्वितीय,अनुपम
    तुम्हारी लेखनी माँ भारती को समर्पित रहे इसी शुभ कामना के साथ भारत माता की जय 🚩
    जय राजवंश 🚩

    जवाब देंहटाएं
  8. अद्भुत,अद्वितीय पंक्तियां👍🇮🇳

    जवाब देंहटाएं
  9. उत्कृष्ट अद्भुत रचना 👏👏❤️

    जवाब देंहटाएं

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