लेखनी ©संजीव शुक्ला

सूरज हर शाम जहाँ तक जा कर धरती से मिल जाता है,
बस वही लेखनी की मंज़िल है हम को लक्ष्य बुलाता है ll
हैँ पृथक सप्तदश चरण किन्तु है मार्ग एक है दिशा एक,
नयनों में विविध स्वप्न पलते सिद्धांत नेक उद्देश्य नेक l
निःस्वार्थ परस्पर नेह बंध मन से हर मन का नाता है l
बस वही लेखनी की मंज़िल है हमको लक्ष्य बुलाता है ll
सागर से हैँ व्यक्तित्व किन्तु कलकल जलधारा से निर्मल,
भर अंक चले चंचल बूँदें बहते जाते निर्झर निश्छल l
ऐसा प्रतीत होता है ज्यों जन्मों का अपना नाता है l
बस वही लेखनी की मंज़िल है हमको लक्ष्य बुलाता है ll
ध्वज लिए लेखनी का पथ पर हम बिना विचारे ज़ब निकले,
पथ नवल प्रदर्शक दीप्ति शिखा आख्या से दृढ स्तम्भ मिले l
वाणी का हिमा, हिया का सँग पल पल उत्साह बढ़ाता है l
बस वही लेखनी की मंज़िल है हमको लक्ष्य बुलाता है ll
शिवि कोमल मन, कृति और रमन, अंजलि संप्रीति खिले उपवन ,
सँग शशि,गोपाल,मानव कमाल रजनी,तुषार महके चंदन l
उत्साह अतुल का देख लेखनी का चेहरा खिल जाता है l
बस वही लेखनी की मंज़िल है, हमको लक्ष्य बुलाता है ll
ऋतू बदले नेह नहीं बदले सब भाग सुभाग बदल जाएँ
खिलते सरोज, शशि की रेखा सँग स्वेत दिव्य मधु ले आएँ l
आशीष ग़ज़ल आकांक्षा से मन *विपिनअभी* मुस्काता है l
बस वही लेखनी की मंज़िल है हमको लक्ष्य बुलाता है ll
@संजीव शुक्ला
अप्रतिम
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
जवाब देंहटाएंअद्भुत
जवाब देंहटाएंवाह! बेहतरीन प्रारंभ। *लेखनी*...😍🤞✨
जवाब देंहटाएं👌👌👌
जवाब देंहटाएं💐😊
हटाएंWaah Sirji gazab👌👌
जवाब देंहटाएंBahut sundar rachna sir ji🙏👌
जवाब देंहटाएंअति उत्कृष्ट एवं हृदयस्पर्शी 👌👌🙏
जवाब देंहटाएं😊😊🙏
हटाएंAdbhut
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया भैया
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएं💐
हटाएंWaah kya khoob likha h sir...sabhi sadasyo ka naam behad sunder dhang se prayog kia h
जवाब देंहटाएंअत्यंत सुन्दर पंक्तियां भाई 👌👌
जवाब देंहटाएंविनम्र आभार बहन जी 😊💐
हटाएंबेहद खूबसूरत
जवाब देंहटाएंBhor ki shuruwat isse achhi kya ho sakti hai ..
जवाब देंहटाएंBahut hu khubsurat
आप सभी का हृदयतल से धन्यवाद
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