नई नई है! ©परमानन्द भट्ट

 आँखों में आज उनके रंगत नई नई है

सपने नये नये यह चाहत नई नई है


पहले मिलन की ख़ुशबू, नस नस मे भर रही जब

दीवाना सोचता यह शिद्दत नई नई है


दो अज़नबी  मिले फिर हमराह बन गये वो

जीवन के रास्ते  में, संगत नई नई है


 कैसी कसक है दिल में, कैसा नशा ये छाया

इस मयक़शी  की उनको , आदत नई नई है


 रक्तिम हुई है आँखे, लब हो गये गुलाबी

कुछ जुस्तज़ू नई है हसरत नई नई है


 यारी ग़मों  से अपनी, टूटी नहीं है अब तक

ख़ुशियों  के संग मेरी, निस्बत नई नई है


 उनको 'परम' से मिलकर, कुछ ऐसा लग रहा है

जैसे जगी ये उनकी, क़िस्मत  नई नई है


  ©परमानन्द भट्ट

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