नहीं ©परमानन्द भट्ट

 बातें करता अगर वो हवाई नहीं

देनी पड़ती उसे फिर सफ़ाई नही


नूर उसका बसा जब नयन में मेरे

कोई तस्वीर दूजी समाई नहीं


अब ख़ुदा  ही करेगा तेरा फैसला

झूठी चलती वहाँ पर गवाही नहीं


रूठ कर चल दिये मुझसे मेरे सनम

बात दिल की जो मैंने बताई नहीं


साथ ग़म के  ही मेरा गुजारा हुआ

इस ख़ुशी से हुई क्यूँ सगाई नहीं


मेरी बातों पे थोड़ा यकीं भी करो 

"है वहम की जहाँ में दवाई नहीं"


 ये 'परम' तो बसा है नयन में तेरे

ये अलग बात देता दिखाई नहीं


©परमानन्द भट्ट

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ वक्त तुम्हारे शहर में गुजार के देखते हैं ©विराज प्रकाश श्रीवास्तव

आञ्जनेय छंद - हनुमान वंदना ©रश्मि शुक्ल 'किरण'

उठ के देख सकारे ©आशीष हरीराम नेमा

हिंदी ©गुंजित जैन